Lessons from De-monetisation - the Bureaucracy Needs a Shake-Up

More than hoarders of black money, the Prime Minister, Mr. Narendra Modi’s announcement on November 8 to demonetize high value currency to strike at the root of illicit wealth appears to have stunned

पाक सेना द्वारा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की लूट तथा विश्व आतंकवाद

पाक आतंकियों के उरी हमले के बाद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हो गये हैं तथा पिछले करीब दो महीने से भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इन हालातों में भी भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केरल के कोजीकोड़ में अपने भाषण में पाक हुक्मरानों को उनके आंतरिक हालातों को बेहतर बनाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि यदि पाक युद्ध ही लड़ना चाहता है तो उसे अपने देश में फैली गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा तथा फैले आतंकवाद से युद्ध लड़कर इनको मिटाकर अपने देश को अमन एवं विकास के मार्ग पर ले जाये और यही कमोवेश पूरा विश्व पाक में चाह रहा है। परन्तु ऐसा होता नहीं दिख रहा

After Demonetization a Good Governance from Babudom is Urgently Required for Transformation of India

The decision of the Prime Minister to demonetize Rs 500 and Rs 1000 notes is a historic step lauded in general by people. The government hopes to win a decisive war against menace of corruption, black money and terrorism in near future. The Prime Minister has earlier also launched many initiatives and schemes like the ‘Digital India’, ‘Skill India’, ‘Beti Bachao–Beti Padhao’ and ‘Make in India’ for fast pace development of India. However their progress and outcome has to be closely monitored to realise the desired benefits.

State Funding of Elections and Political Parties: Is India Ready?

The politico-economic impact of the Bharatiya Janata Party-led National Democratic Alliance (NDA) Government’s de-monetisation decision is being played out since November 8, when Prime Minister Narendra Modi addressed the nation, announced the illegal tendering of the then Rs 500 and Rs 1,000 denomination notes, and added that these denomination notes would be just scraps of paper by that midnight, barely hours after he took the people into confidence. That the Prime Minister chose to make the announcement himself instead of leaving it to the Finance Ministry, added to the dramatic effect.

सशस्त्र सेनाओं को राजनीति से दूर रखें!

भारत की सशस्त्र सेनाओं ने हमारे पश्चिमी पड़ोसी के खिलाफ चार युद्ध लड़े और जीते हैं, एक ऐसे पड़ोसी के खिलाफ, जहां देश के पास सेना नहीं है बल्कि सेना के पास देश है। इन स्पष्ट जीतों के बावजूद भारतीय सेना उस तरह राजनीति की शिकार कभी नहीं हुई है, जैसा हमने पश्चिम में सीमा के पार देखा है। यहां सेना पूरी तरह गैर राजनीतिक रही है, इतनी गैर राजनीतिक कि वहां राजनीतिक चर्चा से भी सख्त परहेज किया जाता है। सशस्त्र सेनाओं ने लोकतांत्रिक भावना का पालन किया है और हमेशा सेना पर ‘असैन्य नियंत्रण’ के सिद्धांत का पालन करते रही हैं। इसी भावना के कारण सरकार उग्रवाद से लेकर प्राकृतिक आपदाओं जैसी घरेलू आपात स्थितियों में

घूसखोरी और काले धन के खिलाफ मोदी का साहसिक संग्राम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों की कानूनी मान्यता 8 नवंबर, 2016 की आधी रात से खत्म होने की जो हैरत में डालने वाली घोषणा की, वह दशकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को घुन की तरह चाट रहे काले धन के अभिशाप पर सबसे हिम्मत भरा हमला है। इस कदम को हरेक स्तर पर गोपनीय रखना था और सरकार इस बात के लिए बधाई की पात्र है कि विभिन्न स्तरों पर सलाह-मशविरे के बावजूद गोपनीयता सुनिश्चित की गई। अब कुछ आंकड़ों पर नजर डालिए।

General Sinha: Great Soldier-Scholar

In passing away of Lieutenant General Srinivas Kumar Sinha, PVSM, on 17 Nov 2016, at the ripe age of 90 years, the nation has lost one of her most celebrated soldier scholar.

आतंकवाद ही था असली एजेंडा

ब्रिक्स और बिम्सटेक शिखर बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद के साथ उसके संबंधों के मसले पर जिस तरह आड़े हाथों लिया, वह भारत में कई लोगों को अतिवादी लगा। आलोचना के विभिन्न बिंदुओं का सार यही है कि इन बहुपक्षीय आयोजनों में पाकिस्तान पर इतना ज्यादा ध्यान देकर हमने अपना कूटनीतिक दायरा छोटा कर लिया, खुद को एक बार फिर पाकिस्तान से जोड़ लिया और इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने बढ़ते कद को बौना कर लिया। भारत को छोटे देशों की जमात में नहीं आना चाहिए, जो बहुपक्षीय मंचों पर भी केवल एक मुद्दे के पीछे पड़े रहते हैं। दलील दी जाती है कि ऐसे मंच किसी भी मुद्दे पर प्रतिभागियों का रु

Demonetization: Restoring Probity in public Life

The dramatic announcement by the Prime Minister on the 08-11-2016 regarding De-monetising Rs 500 and Rs 1000 notes from the midnight of the same day has electrified the national mood and has altered the paradigm of public life.