अफगानिस्तान: भारत के विकल्प

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी का भारत दौरा महत्वपूर्ण समय में हुआ और यह दौरा निकट भविष्य में भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों की दशा और दिशा तय कर सकता है। भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों को नई अहमियत कुछ हद तक विशेष क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण मिली है, कुछ हद तक इसलिए है क्योंकि अफगान सरकार को महसूस हो चुका है कि अपने अप्रिय पड़ोसी पाकिस्ताना से कुछ भी सकारात्मक मिलने की उम्मीद करना बेमानी है और कुछ हद तक इसलिए भी है कि भारत सरकार को लग रहा है कि पाकिस्तान की संवेदनाओं की फिक्र करने (जो मनमोहन सिंह के समय की खासियत थी) के बजाय भारत को अफगानिस्तान की सुरक्षा का ज्यादा खयाल करना चाह

BRICS Forum under Indian Stewardship: Prospects and Issues

Prime Minster Modi’s aim during his Chairmanship of the Brazil, Russia, India, China and South Africa or the ‘BRICS’ forum is to give it shape and substance both in terms of making it a responsible multilateral institution, firstly, as an important factor in geopolitics, and secondly, in the emerging economic discourse.

Pakistan's Anti-Terror Moves: Wait, Watch, Verify but Never Trust

For a few days now, a report in the Pakistan daily Dawn has caused considerable interest, and in some cases even excitement, among Pakistan watchers, not just in India but also in other parts of the world. The report talks of the civilian government in Islamabad informing the military ‘government’ in Rawalpindi of Pakistan's growing international isolation and the need to crackdown on terror groups like the Haqqani Network (HN), Jaish-e- Mohammad (JeM) and Lashkar-e-Taiba/JamaatudDawa (LeT/JuD) to gain any traction with the international community.

India’s New Pre-Emptive Action and Equivalent Retaliation (PAER) Strategy

Most people see India’s recent surgical strikes as retaliation and an avenging of the Uri terror attack. While there is some truth in this, it is not the complete truth. India has been sufferingacts of terror

पानी के अधिकार पर धधकती आग

पखवाड़े भर पहले बेंगलूरु और चेन्नई में हिंसा भड़क उठी। लोगों की जानें गईं और आगजनी करने वालों ने करोड़ों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति नष्ट कर दी। इसकी वजह उच्चतम न्यायालय का 5 सितंबर का आदेश था, जिसके मुताबिक कर्नाटक को अगले 10 दिन तक रोज तमिलनाडु के लिए 15,000 क्यूसेक पानी छोड़ना था। बाद में इसे घटाकर 12,000 क्यूसेक प्रतिदिन कर दिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। शुक्र है कि वह पागलपन अब थम चुका है। लेकिन दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी के बंटवारे का विवाद सुलग रहा है। सौहार्दपूर्ण समाधान दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है और सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

From Terrorism to Terror: Worrisome Developments for the International Community

Ever since the territories under the captivity of the terrorist organisation—Islamic State of Iraq and Syria (ISIS)—began to be recaptured, several analyses have been made predicting the outfit’s doomsday. The rapidly depleting financial sources and the reduction in the size of foreign fighters in the so-called caliphate are other attributing factors for this prognosis. While the ongoing discussions about the trampling of ISIS hold some substance, a complete defeat of its extremist ideology is nowhere in the vicinity.

पाकिस्तान के बारे में यथार्थ भरी समझ

कश्मीर में हिंसक विरोधों की झड़ी और मानवाधिकार उल्लंघन के झूठे आरोपों के साथ भारत को बदनाम करने की पाकिस्तान की धूर्तता भरी कोशिशों कूटनीतिक दुनिया में पुराना और हमेशा प्रासंगिक रहने वाला सवाल एक बार फिर खड़ा कर दिया है, “पाकिस्तान से कैसे निपटा जाए?” बार-बार यह महसूस होता आया है कि पिछले 60 साल में भारत के पास कोई व्यवस्थित और दीर्घकालिक पाकिस्तान नीति नहीं रही है। हमारी नीति अधिकतर प्रतिक्रियावादी, उसी समय काम करने की पक्षधर और अल्पकालिक होती है तथा गलत अनुमानों पर आधारित होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे सैन्य अधिकारियों तथा नौकरशाहों/कूटनीतिक खेमे के बीच संवाद की कमी या अफसरों में

Breaking Through A Strategic Log-Jam

At the outset, the Modi Government needs to be complimented for administering a most befitting and unambiguous message to Pakistan that the continuing acts of terrorism perpetrated by its ‘deep state’, through its pet ‘jihadists’, would no more be tolerated in helplessness. That message was finally delivered after a decade of dithering during which political ‘will’ was held hostage to timid fears of ‘escalation’; and that in spite of being served by a highly professional military institution, when the present Government decided to call the bluff.