चीन ने बढ़ाए दलाई लामा का प्रभाव कम करने के प्रयास
Jayadeva Ranade

चीन के भीतर रहने वाले तिब्बतियों पर चौदहवें दलाई लामा का प्रभाव घटाने और उन्हें नीचा दिखाने के लिए चीनी प्रशासन के प्रयास पिछले कुछ महीनों से स्पष्ट रूप से बढ़ गए हैं। साथ ही इस वर्ष चीन के राजनीतिक कैलेंडर में कई वर्षगांठें मनाई जानी हैं जैसे अक्टूबर में चीन गणराज्य (पीआरसी) की स्थापना का 70वां वर्ष, अप्रैल में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (प्लान) का स्थापना दिवस, जून में संवेदनशील थ्येन आनमन ‘कांड’ की 30वीं बरसी और 10 मार्च को तिब्बत से चौदहवें दलाई लामा के पलायन की 60वीं वर्षगांठ। इनमें से अंतिम दो चीनी नेतृत्व को सबसे असहज करने वाले होंगे। चीन-अमेरिका संबंधों में हाल में आए तनाव ने भी पेइचिंग का सिरदर्द बढ़ा दिया है।

तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र (टार) में अरबों डॉलर के निवेश और तिब्बती आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा के सख्त उपायों को और भी मजबूत करने के बावजूद तिब्बतियों में आक्रोश बरकरार है और अक्सर विरोध तथा आत्मदाह की घटनाएं होती रहती हैं।

टार क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख ची झाला ने टार की 11वीं पीपुल्स कांग्रेस के दूसरे सत्र में 19 जनवरी, 2019 को सरकार के कामकाज पर अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि तिब्बत में 1.80 लाख लोगों को गरीबी से निकाला गया। “सरकार और पार्टी” द्वारा तिब्बत को दी जा रही मदद पर जोर देते हुए ग्लोबल टाइम्स (11 जनवरी) ने लोगों को चेतावनी दी कि आगाह किया कि दलाई लामा, “जिन्हें अलगाववादी माना जाता है और जो 60 वर्ष पहले भागकर निर्वासन में चले गए थे”, के “ढोंग भरे” पक्ष को पहचान लेना चाहिए। 5 मार्च, 2019 को पेइचिंग में ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के पूर्ण सत्र के दौरान सरकार के कामकाज पर अपनी रिपोर्ट में चीनी प्रधानमंत्री ली कच्यांग ने भी जोर देकर कहा कि अत्यंत गरीबी वाले क्षेत्रों जैसे “तीन क्षेत्रों तथा तीन प्रांतों” में गरीबी दूर करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इनमें तिब्बत और तिब्बतियों की भारी जनसंख्या वाले सिचुआन, युन्नान, गांसू तथा चिंगहाई प्रांत शामिल हैं।

शेनझेन म्युनिसिपल सरकार के पॉलिसी रिसर्च ऑफिस में निदेशक वू सिकांग ने अगस्त, 2018 में अध्ययन के लिए अमेरिका का दौरा करने के बाद पिछले अक्टूबर में एक ‘आंतरिक’ रिपोर्ट लिखी, जिसमें उन्होंने अमेरिका की तीखी आलोचना की। उन्होंने विशेष तौर पर कहा कि अमेरिका ने कुछ वर्ष रुकने के बाद पिछले वर्ष से ही तिब्बतियों को वित्तीय सहायता बढ़ाकर 1.7 करोड़ डॉलर कर दी। हालांकि वास्तव में अमेरिकी वित्तीय सहायता की कुल मात्रा पिछले दो वर्षों में बढ़ी नहीं है, लेकिन भारत और नेपाल में तिब्बत से जुड़ी गतिविधियों के लिए निर्धारित राशि 30 लाख डॉलर से बढ़ाकर इस वर्ष 60 लाख डॉलर कर दी गई है। इससे पेइचिंग का संदेह निश्चित रूप से बढ़ गया है और उसी चिंता के कारण वह नेपाल पर अधिक ध्यान दे रहा है। उदाहरण के लिए नेपाल में चीन के दीर्घकालीन हित की बात नेपाली परिवहन मंत्री के (22 फरवरी के) बयान से भी पता चलती है, जिसमें उन्होंने कहा कि नेपाल पूरे देश में जो रेल नेटवर्क बिछाने जा रहा है, उसके लिए चीनी गेज मानकों का इस्तेमाल किया जाएगा। चीन को लंबे अरसे से हिचक रही है “शत्रु विदेशी ताकतें” तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र के भीतर तिब्बतियों द्वारा चलाई जा रही चीन विरोधी गतिविधियों के लिए नेपाल को लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल करेंगी। पेइचिंग में इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एंड साउथईस्ट एशियन एंड ओशिएनिया स्टडीज के निदेशक हू शिशेंग ने भी ग्लोबल टाइम्स में एक टिप्पणी (11 जनवरी) में अमेरिकी संलिप्तता की बात की। उन्होंने कहा कि “हालांकि कुछ अमेरिकी राजनेता मानवाधिकार जैसे मसलों पर 2019 में चीन के खिलाफ तिब्बत मसले का इस्तेमाल जारी रखेंगे, लेकिन चीन को ऐसी राजनीतिक तरकीबों को नजरअंदाज करना चाहिए और क्षेत्र में विकास के विभिन्न रास्ते तलाशने पर ध्यान देना चाहिए।”

चीनी नेतृत्व का ध्यान विशेष रूप से 10 मार्च को तिब्बतियों के लिए दलाई लामा के वार्षिक संदेश पर रहेगा। जब यह संदेश आएगा, उस समय चीन में कड़ी सुरक्षा के बीच नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) का 10 दिन का पूर्ण अधिवेशन चल रहा होगा। एनपीसी को चीन की संसद भी कहा जाता है और उसका अधिवेशन 5 मार्च को आरंभ होगा। चीन की घबराहट इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में इस बात की आशंका है कि अमेरिका ने तिब्बतियों को सहायता बढ़ा दी है। उनकी चिंता को इस बात से भी बढ़ावा मिला है कि चीन में तिब्बती दलाई लामा की पूजा जारी रख रहे हैं।

तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र के अधिकारियों ने इस वर्ष सुरक्षा संबंधी अधिक एहतियात बरते हैं। देसी-विदेशी पर्यटकों को इस वर्ष 30 जनवरी से 30 अप्रैल तक तिब्बत में जाने की मनाही है। तिब्बती नए वर्ष “लोसार” की पूर्व संध्या पर 29 जनवरी को टार पार्टी कमेटी के कार्यकारी वाइस चेयरमैन ने ल्हासा के दो सबसे प्रसिद्ध मठों द्रेपंग और गादेन का निरीक्षण किया। वहां उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “तिब्बत की स्थिरता राष्ट्ररीय स्थिरता के लिए अहम है और तिब्बत की सुरक्षा बरकरार रखना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक है।” बाद में 7 मार्च को बड़ी संख्या में सशस्त्र पुलिस की टुकड़ियों और जवानों को ले जाने वाले बख्तरबंद वाहनों ने ल्हासा की सड़कों और पोतला पैलेस के सामने वाले चौराहे पर परेड की।

ल्हासा में 21 फरवरी को टार पार्टी स्कूल में एक विशेष उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें सुरक्षा तथा “राष्ट्रीय संप्रभुता को बड़े जोखिमों” से बचाने के तरीकों पर चर्चा की गई। इसमें टार के वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिनमें टार पीपुल्स गवर्नमेंट के चेयरमैन, तिब्बत में पीएलए फौज के राजनीतिक प्रमुख और टार की सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख शामिल थे। बैठक को टार के पार्टी सचिव वू यिंगची ने संबोधित किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से “नई समस्याओं” और “नई चुनौतियों” के समय पार्टी के साथ सहयोग करने का अनुरोध किया और “अलगाववादी विरोधी संघर्ष” तेज करने, “धर्म के नकारात्मक प्रभाव” कम करने के लिए सामाजिक स्थिरता (सुरक्षा उपायों को दिया गया नाम) की पहलों में सक्रिय सहभाग करने, “दलाई गिरोह” के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और टिकाऊ तथा दीर्घकालीन स्थिरता हासिल करने का आह्वान किया। इस मामले में उन्होंने “संपन्न” सीमावर्ती गांवों के निर्माण को तेज करने की अहमियत पर जोर दिया, जिन्हें टार की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के इर्दगिर्द सुरक्षा चक्र के तौर पर तैयार किया जा रहा है। दिलचस्प है कि वू यिंगची ने लंबे अरसे बात सीधे तौर पर “दलाई गिरोह” की आलोचना की।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की चिंताओं को प्रकट करते हुए टार रीजनल कमीशन फॉर डिसिप्लिन इंस्पेक्शन के प्रचार विभाग ने 1 फरवरी, 2019 को 46 मिनट का चार हिस्सों वाला एक वीडियो जारी किया, जो 28 से 31 जनवरी तक तिब्बत में टीवी पर प्रसारित किया गया। इसमें कहा गया कि पार्टी के उन नेताओं को दंडित किया जाएगा, जो धार्मिक आस्था रखते हैं या “अलगाववाद” अथवा भ्रष्टाचार में “कथित” तौर पर लिप्त हैं। रिपोर्ट में तिब्बत के कुछ “दोगले” लोगों पर सीधे आरोप लगाया गया कि वे पार्टी के प्रति वफादारी का दावा करते हैं, लेकिन गुपचुप तरीके से “अलगाववादियों” के प्रति सहानुभूति रखते हैं और उनके लिए काम भी करते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी के कितने सदस्यों का पर्दाफाश हुआ और कितनों को किस उल्लंघन के लिए सजा दी गई, लेकिन वीडियो में बताया गया कि अक्टूबर, 2018 तक कुल 215 लोगों को दंडित किया गया है। मगर ल्हासा में तिब्बत यूनिवर्सिटी में मानवजाति अध्ययन के प्रोफेसर श्योंग कुनशिन के हवाले से कहा गया कि क्षेत्रीय सरकार ने उन लोगों को पहले ही पहचान लिया है और उन्हें बर्खास्त करने के लिए नियमों को कठोर बनाया जा रहा है।

टार के हरेक गांव में पहले ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को तैनात कर दिया गया है, जिससे पार्टी की निगरानी मजबूत हुई है। नवंबर, 2017 में पार्टी के 19वें सम्मेन के बाद सरकारी अखबार तिब्बत डेली ने खुलासा किया कि तिब्बतवासियों को पार्टी का संदेश देने के लिए 20,000 से अधिक पार्टी सदस्यों को गांवों और 7,000 मठों में भेजा गया है। चीन के सरकारी मीडिया ने 21 फरवरी, 2019 को घोषणा की कि पिछले 18 महीनों में 8 लाख से अधिक तिब्बतियों को 19वें पार्टी सम्मेलन के विचारों की “शिक्षा” दी गई है और यह काम पूरे टार में 9,000 संगोष्ठियों के आयोजन तथा प्रचार सामग्री की 70,000 प्रतियों के वितरण के जरिये किया गया है।

अब व्यापक कार्यक्रम आरंभ करने के फैसले की पुष्टि करते हुए टार के अधिकारियों ने 22 जनवरी, 2019 को ऐलान किया कि तिब्बत में अर्द्धसैनिक बलों की निगरानी में शिगात्से में नया प्रशिक्षण शिविर आरंभ किया गया है, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं के विचारों को “सुधारा” जाएगा तथा “अनुकूल” बनाया जाएगा। इसे व्यापक तिब्बत समाज को राजनीतिक “शिक्षा” देने का जिम्मा दिया गया है। अलग से घोषणा की गई कि मई, 2019 में एक बड़ा ‘तिब्बत यूथ पैलेस’ खोला जाएगा ताकि युवाओं में “देशभक्ति की शिक्षा” मजबूत की जा सके।

चीन द्वारा नियुक्त पंचेन लामा ग्यालत्सेन नोरबू को भी इस प्रयास में शामिल किया गया है। 10वें पंचेन लामा की 30वीं पुण्यतिथि पर चाइना तिब्बतोलॉजी रिसर्च सेंटर द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए ग्यालत्सेन नोरबू ने कहा कि 10वें पंचेन लामा चीनी राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। उन्होंने दलाई लामा तथा चीन के बाहर रहने वाले तिब्बतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि “अलगाववादी ताकतें” 10वें पंचेन लामा के भाषणों को तोड़मरोड़कर पेश कर रही हैं तथा उनका दुरुपयोग कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने जीवन में कभी भी कम्युनिस्ट पार्टी में उनका भरोसा खत्म नहीं हुआ। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट के प्रमुख ने भी 26 फरवरी को ग्यालत्सेन नोरबू से मुलाकात की तथा उनकी शिक्षा में प्रगति पर उन्हें बधाई दी।

ल्हासा के मेयर और तिब्बती मूल के गुओ गुओ ने 7 मार्च को ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में एनपीसी के तिब्बत डेप्युटी तथा पत्रकारों के सामने इस बात की पुष्टि की कि तिब्बती बौद्ध मत की पूजा पर नियंत्रण और नियमन के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि “2018 में ल्हासा ने धर्म के जरिये थोपे जा रहे दलाई लामा के नकारात्मक प्रभाव को खत्म करने का स्पष्ट फैसला किया और परोक्ष धार्मिक प्रभाव दूर करने के बड़े प्रयास किए।” उन्होंने बताया कि धार्मिक आयोजनों के दिन और उनमें हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या घटकर 10 फीसदी से भी कम रह गई है! तिब्बतियों में छात्रों, सरकारी एवं पार्टी कार्यकर्ताओं तथा पेंशनभोगियों के बड़े वर्गों को चेतावनी दी गई है कि धार्मिक कार्यक्रमों तथा रीति-रिवाजों में हिस्सा लेने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ल्हासा के मेयर के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि भिक्षुओं तथा मठों की कई प्रकार की गतिविधियां बंद करा दी गई हैं।

(लेखक भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं और अभी सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटेजी के अध्यक्ष हैं)


Translated by Shiwanand Dwivedi (Original Article in English)
Image Source: https://www.vifindia.org/sites/default/files/tibet-jail.jpg

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