हॉन्ग कॉन्ग मसले पर पार्टी के भीतर मतभेद शी चिनफिंग के लिए समस्या
Jayadeva Ranade

चीन का नेतृत्व हॉन्ग कॉन्ग में 9 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन की तस्वीरों और वीडियो से भड़का जरूर होगा। वहां प्रदर्शनकारी अमेरिका के झंडे हाथ में लेकर “अमेरिका आओ और हॉन्ग कॉन्ग पर कब्जा कर लो” के नारे लगा रहे थे। ये प्रदर्शन लाखों हॉन्ग कॉन्ग वासियों द्वारा चीनी शासन के खिलाफ 15 से भी अधिक हफ्तों से किए जा रहे विरोध का नतीजा हैं और इनके कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चीन का प्रतिकूल प्रचार भी हो रहा है। इससे ‘रंगीन क्रांति’ की वह चिंता भी सामने आती है, जो बाइदेहे में वार्षिक सम्मेलन में वरिष्ठ नेताओं ने जताई थी।

10 सितंबर को हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शनकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग के लिए नया ‘गीत’ अपना लिया, जिसे एक ही रात में 7 लाख से अधिक बार देखा गया और जिसे सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ गा रही है। अगले दिन सरकारी अखबार ‘चाइना डेली’ ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक नोटिस पोस्ट किया, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शनकारियों की 11 सितंबर से विरोध प्रदर्शन तेज करने की गोपनीय योजना है, जिसके तहत “बड़े आतंकी” हमले किए जाएंगे, हॉन्ग कॉन्ग में गैस पाइपलाइन उड़ा दी जाएगी और कैंटनीज भाषा नहीं बोलने वालों पर हमले किए जाएंगे।

हॉन्ग कॉन्ग में विरोध को कुचलने में शी चिनफिंग को जो हिचक हो रही है, उससे चीन के शीर्ष नेतृत्व पोलितब्यूरो ओर पोलितब्यूरो स्थायी समिति के बीच मतभेद का पता चलता है। बताया जाता है कि शी चिनफिंग ने अगस्त के मध्य में कहा था कि हॉन्ग कॉन्ग में समस्या के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को ही उसे सुलझाना चाहिए। उनका इशारा पोलितब्यूरो स्थायी समिति में सातवें स्थान के सदस्य हान झेंग की ओर था, जिन पर हॉन्ग कॉन्ग और मकाउ को संभालने की जिम्मेदारी है।

चीन में नेतृत्व के विभिन्न गुटों से जुड़ी समाचार संस्थाओं द्वारा की जा रही रिपोर्टिंग से भी चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेदों के संकेत मिले। अमेरिका से चल रहा डुओ वेई न्यूज (डीडब्ल्यू न्यूज) और हॉन्ग कॉन्ग में एचके01 यू पिन्हाई के हैं, जिनके चीन में कई थिएटर भी हैं और जिनकी डोर शी चिनफिंग गुट के हाथ में है। अमेरिका से चल रहा बोशुन चीन के पूर्व राष्ट्रपति च्यांग झेमिन से जुड़ा है।

एचके01 ने नरम आलोचना के लहजे में कहा कि हॉन्ग कॉन्ग का मामला सीधे पोलितब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य हान झेंग के हाथ में है और हॉन्ग कॉन्ग में 1 जुलाई का प्रदर्शन शुरू होने के बाद से शेन्झेन की यात्रा करने वाले वह पहले वरिष्ठ चीनी नेता हैं। इसी से पता चलता है कि “पेइचिंग हॉन्ग कॉन्ग पर कितना ध्यान दे रहा है।” उसने यह भी कहा कि अतीत में जब भी हॉन्ग कॉन्ग में कोई बड़ा कार्यक्रम हुआ है तो सीसीपी का कोई न कोई शीर्ष नेता उसका काम देखने के लिए शेन्झेन में रहा है। हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें 1 जून से आरंभ हुईं। 5 जुलाई को खबर मिली कि हान झेंग पेइचिंग लौट गए हैं और हॉन्ग कॉन्ग की स्थिति संभालने का काम शुरू हो गया है। एचके01 ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व हॉन्ग कॉन्ग की घटनाओं से हक्का बक्का रह गया है!

इपॉक टाइम्स (20 जुलाई) ने पेइचिंग में एक ‘छोटे राजकुमार’ के हवाले से कहा कि सीसीपी के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग से कई गलतियां कराने की कोशिश की है। उन्होंने बल और सेना का प्रयोग करने की सलाह दी या सुझाव दिया कि सेना को नियंत्रण अपने हाथ में लेने दिया जाए। मगर राजकुमार ने कहा कि शी चिनफिंग एकदम स्पष्ट हैं कि खून नहीं बहाया जाएगा और 4 जून जैसी घटना को किसी भी कीमत पर टाला जाएगा। खबरों के मुताबिक हॉन्ग कॉन्ग में तैनात पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के कमांडर मेजर जनरल चेन दोओशियांग ने अमेरिकी रक्षा विभाग में एशिया एवं प्रशांत सुरक्षा मामलों के प्रधान उप सहायक रक्षा सचिव डेविड हेल्वी से 13 जून को कहा कि पेइचिंग सेना का प्रयोग नहीं करेगा। इसकी पुष्टि आधिकारिक ‘द पेपर’ ने की, लेकिन उसने यह भी कहा कि चेन दाओशियांग ने “हॉन्ग कॉन्ग में हाल में हुई अत्यधिक हिंसा की घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की है और “सात संकल्पों” के साथ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।”

विरोध प्रदर्शनों से पता चलता है कि 20 वर्ष पहले हॉन्ग कॉन्ग को वापस चीन में मिलाए जाने के बाद भी न तो हॉन्ग कॉन्ग के नागरिक और पेइचिंग एक दूसरे पर भरोसा करते हैं और न ही ‘एक देश, दो व्यवस्था’ का सिद्धांत कारगर साबित हो पाया है। हॉन्ग कॉन्ग एवं मकाउ मामलों का कार्यालय और हॉन्ग कॉन्ग में चीन का पुराना प्रतिनिधि शिन्हुआ निश्चित रूप से यह नहीं भांप पाए कि जनता कितनी नाराज है। ता कुंग पाओ, वेन वेई पो, सिंग पो डेली न्यूज, ओरियंटल डेली न्यूज, सिंग ताओ डेली और अन्य पेइचिंग समर्थक अखबार भी इससे वाकिफ नहीं थे। पिछले कई दशकों में हॉन्ग कॉन्ग के हरेक तबके में पैठ बना चुकी सीसीपी भी इस मामले में नाकाम रही। ऐसा तब हुआ, जब हॉन्ग कॉन्ग के ढेरों कारोबारी उसके करीब हैं, कम से कम 15 पेइचिंग समर्थक समूह और चीनी प्रांतों से जुड़े संगठन उसके साथ हैं और हॉन्ग कॉन्ग के सबसे बड़े श्रम संगठन हॉन्ग कॉन्ग फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स की डोर सीसीपी के हाथ में है। खबरों से पता चलता है कि जुलाई के अंत से ही हॉन्ग कॉन्ग में तैनात चीनी कार्यालयों के एक दर्जन से अधिक अधिकारियों को सजा दी गई है और कुछ को बर्खास्त भी कर दिया गया है। इनमें हॉन्ग कॉन्ग स्थित सीसीपी लायजन ऑफिस और स्टेट काउंसिल के हॉन्ग कॉन्ग एवं मकाउ मामलों के कार्यालय में तैनात अधिकारी भी शामिल हैं।

चीन ने शुरुआत में अपने आधिकारिक घरेलू मीडिया को विरोध की कोई भी खबर चलाने से प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन बाद में उसे केवल “हिंसा” पर ध्यान देने और विरोध प्रदर्शन को विदेशी आर्थिक मदद से चलने वाला बताने का निर्देश दिया। अंतरराष्ट्रीय विचारों की चिंता में पेइचिंग ने जनता का समर्थन जुटाने के लिए फेसबुक, ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल किया। उसने पेइचिंग समर्थक छात्रों तथा विदेश में रहने वाले प्रमुख व्यक्तियों की सभाएं आयोजित कीं तथा हॉन्ग कॉन्ग के कारोबारियों एवं कंपनियों से हिंसा की निंदा करने वाला प्रचार करने का अनुरोध किया। चीन के मीडिया ने प्रचार किया कि ब्रिटेन, दक्षिण कैलिफोर्निया, बांग्लादेश, हंगरी, मैडागास्कर, मैड्रिड आदि में काम कर रहे चीनी संगठनों ने चीन के आंतरिक मामलों में दखल की आलोचना की है।

हाल के हफ्तों में चीन का रुख सख्त हो गया है। प्रदर्शनकारी इकट्ठे होने और अपनी गतिविधियों की जानकारी देने के लिए हॉन्ग कॉन्ग के ऑनलाइन चर्चा मंच LIHKG का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके सर्वरों डिजिटल हमलों की बौछार एकाएक बढ़ गई है। LIHKG ने कहा, “हमलों के पीछे ताकत या राष्ट्रीय स्तर की ताकत का हाथहै क्योंकि इन हमलों में दुनिया भर के बॉटनेट का इस्तेमाल किया गया।” कैथे पैसिफिक के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और कंपनी को चीन के नागरिक उड्डयन प्रशासन ने “बड़े विमानन सुरक्षा जोखिम की चेतावनी” दे डाली, जिसके बाद उसके शेयरों में तेज गिरावट आ गई। पड़ोसी शेनझेन के बाहर पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (पीएपी) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की गतिविधियों की खबरों और तस्वीरों से सैन्य कार्रवाई के संकेत मिले।

पिछले दो वर्ष से चीन को पश्चिम के इरादों पर संदेह है, जो अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से और बढ़ गया है। इसलिए चीन ने विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बता दिया और यह भी कहा कि यह “रंगीन क्रांति” कराने की पश्चिम की कोशिशों का हिस्सा है। पूर्वी यूरोप और मिस्र में सरकारों का तख्तापलट करने के लिए हुए आंदोलनों को “रंगीन क्रांति” कहा जाता है, लेकिन चीन ने 1990-91 से इस वर्ष जनवरी तक इसका ज्यादा नाम नहीं लिया था। जनवरी में शी चिनफिंग ने इसका जिक्र किया। हॉन्ग कॉन्ग के मिंग पाओ न्यूज ने 17 अगस्त को लिखा कि बाइदेहे में वार्षिक सम्मेलन के दौरान सीसीपी के वरिष्ठ सदस्य इस बात पर सहमत हो गए कि हॉन्ग कॉन्ग में निष्कासन विरोधी प्रदर्शनों को “विभिन्न राष्ट्रों एवं क्षेत्रों की सैन्य एवं राजनीतिक एजेंसियों द्वारा कराई जा रही रंगीन क्रांति” बताया जाए और सीसीपी को उनका निशाना बताया जाए। मिंग पाओ ने कहा कि सदस्यों की नजर में हॉन्ग कॉन्ग सरकार निश्चित समय में प्रदर्शनों से निटपने में संभवतः सक्षम नहीं है और पेइचिंग उसे “कानूनन” जरूरी सहायता प्रदान कर सकता है। सम्मेलन में हिस्सा लेने वालों में चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू चिंताओ एवं च्यांग झेमिन भी शामिल थे। राज्य परिषद के हॉन्ग कॉन्ग एवं मकाउ मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता यांग गुआंग ने 3 सितंबर को कहा कि प्रदर्शनों का “भविष्य स्पष्ट रूप से रंगीन क्रांति ही नजर आ रहा है” और उनका लक्ष्य हॉन्ग कॉन्ग सरकार को अपंग बनाना, विशेष प्रशासन क्षेत्र को चलाने का अधिकार हाथ में लेना और “एक देश, दो व्यवस्था” के विचार को खोखला बना देना है। शेनझेन यूनिवर्सिटी में हॉन्ग कॉन्ग एंड मकाउ स्टडीज के प्रोफेसर झांग दिंगह्वाई ने भी ‘रंगीन क्रांति’ के तत्व गिनाते हुए कहा कि हॉन्ग कॉन्ग में हो रहे प्रदर्शनों में इनमें से कई तत्व शामिल हैं और ये चीन के संविधान की अवहेलना कर रहे हैं।

हॉन्ग कॉनग के पूर्व मुख्य कार्य अधिकारी तंग ची-ह्वा ने 31 जुलाई को अपनी सरकार समर्थक ‘अवर हॉन्ग कॉन्ग फाउंडेशन’ में कहा, “राजनीतिक तूफान को - इसकी गंभीरता, स्तर एवं संगठन को - करीब से देखने पर यही माना जाएगा कि इसे पीछे से कोई हवा दे रहा है। विभिन्न बातें ताइवान और अमेरिका की ओर इशारे कर रही हैं।” उन्होंने दावा किया कि विदेशी राजनेताओं और चीन-विरोधी ताकतों ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का डर खड़ा करने की तथा हॉन्ग कॉन्ग को केंद्र सरकार के विरोध का अड्डा बनाने की कोशिश की है। साथ ही उन्होंने कहा कि “लोगों का एक छोटा सा झुंड केंद्र सरकार एवं विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के संबंध बिगाड़ने” की कोशिश कर रहा है, जिसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा।

जरूरत पड़ने पर चीन द्वारा ताइवान को मुख्य भूमि में बलपूर्वक मिलाए जाने की धमकियों के बीच हॉन्ग कॉन्ग बहुत सतर्कता के साथ हालात पर नजर रख रहा है। प्रदर्शनों ने जनवरी में होने वाले चुनावों से पहले ताइवान की राष्ट्रपति साई इंगवेन की लोकप्रियता बहुत बढ़ा दी है। हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनकारियों के ताइवान में आने की खबरों पर उनकी प्रतिक्रिया दिलचस्प थी। उन्होंने कहा, “हॉन्ग कॉन्ग से आ रहे इन दोस्तों के साथ मानवीय आधार पर उचित बर्ताव किया जाएगा।”

पेइचिंग के सख्त रवैये के अन्य संकेतों में चीनी भाषा के आधिकारिक ग्लेबल टाइम्स में 17 अगस्त को छपा एक आलेख भी शामिल है, जिसमें इशारा किया गया कि आंदोलन के ‘नेताओं’ को दंडित किया जाएगा। इनमें (i) जुलाई में पेंस, पॉम्पिओ और बोल्टन से मुलाकात करने के लिए तथा न्यूयॉर्क टाइम्स में निष्कासन विरोधी बयान छपवाने के लिए जिमी लाई; (ii) मई में पॉम्पिओ से तथा अगस्त में हॉन्ग कॉन्ग में अमेरिकी महावाणिज्य दूत जून ईडे से मुलाकात के लिए मार्टिन ली चू-मिंग; (iii) पेन्स, पेलोसी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने और मार्च में अमेरिका से पेइचिंग पर दबाव बनाने की अपील करने तथा अगस्त में जूली ईडे से मिलने के लिए आनसोन चान; (iv) जुलाई में युएन लॉन्ग में प्रदर्शनों में हिस्सा लेने तथा अगस्त में एक विदेशी पुरुष से मिलने के लिए अलबर्ट हो चुन-यान; (v) अगस्त में जूली ईडे से मुलाकात एवं प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने के लिए जोशुआ वॉन्ग ची-फंग; (vi) पुलिस बल को खतरे में डालने वाली अफवाहें फैलाने एवं सोशल मीडिया के जरिये लोगों से प्रदर्शनों में हिस्सा लेने की अपील करने तथा अगस्त में जूली ईडे से मिलने के लिए नाथन लॉ कुन-चुंग और (vii) अमेरिका में मार्च में एक भाषण में यह कहने कि हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंत्र तथा आजादी नहीं है, अमेरिका के निचले सदन से हॉन्ग कॉन्ग की गतिविधियों का अध्ययन करने का आह्वान करने और अगस्त में न्यूयॉर्क में चीनी वाणिज्य दूतावास के सामने विरोध गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए एलेक्स चाउ यॉन्ग-कांग के नाम शामिल हैं।

चीन की नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस की स्थायी समिति के विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता झांग तिएवेई ने सभी को मताधिकार देने की मांग मानने की संभावना 21 अगस्त को खारिज कर दी और दोहराया कि “हाल ही में हॉन्ग कॉन्ग में कुछ अवैध अपराधियों ने विधायिका पर खुलेआम हमला किया, पुलिस पर हिंसक हमला किया और निर्दोष लोगों को जानबूझकर पीटा। ये हरकतें किसी भी देश में कानूनन गंभीर अपराध होते हैं और कानून के मुताबिक ही इनकी सजा दी जाएगी।”

प्रदर्शनों से हॉन्ग कॉन्ग की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और चीन के लिए उसकी अहमियत कम हो गई है। बड़ी संख्या में कारोबारी अपनी संपत्ति हॉन्ग कॉन्ग से बाहर ले गए हैं और वहां पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या में भी जून से कमी आई है। 16 अगस्त को जारी आधिकारिक आंकड़ों में पता चला कि दूसरी तिमाही में हॉन्ग कॉन्ग की जीडीपी वृद्धि पिछले वर्ष की दूसरी तिमाही के मुकाबले 0.5 प्रतिशत कम हो गई, जो सात से भी ज्यादा वर्षों में सबसे कम आंकड़ा है। साथ ही हॉन्ग कॉन्ग के रास्त आयात-निर्यात होने वाले माल की कीमत भी 2019 की पहली छमाही में क्रमशः 4.5 फीसदी तथा 3.6 फीसदी कम हो गई। हॉन्ग कॉन्ग के अधिकारियों का अनुमान है कि सामाजिक अशांति तथा बढ़ते व्यापार युद्ध के बीच हॉन्ग कॉन्ग मंदी के कगार पर पहुंच गया है।

लगातार जारी प्रदर्शनों ने निश्चित रूप से चीन के नेतृत्व को बेहद शर्मसार किया है और प्रदर्शन सीसीपी की वैधता की कसौटी बन गए हैं। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इन्हें जारी नहीं रहने दे सकते क्योंकि इनसे उनका रुतबा भी कम होगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय राय महत्वपूर्ण है, लेकिन चीन अपने भीतर तथा ताइवान में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के संभावित परिणाम को लेकर अधिक चिंतित होगा। पेइचिंग दूसरों को काबू में करने एवं हॉन्ग कॉन्ग में शांति बहाल करने के लिए संभवतः हॉन्ग कॉन्ग की सेना का इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। चीन नहीं चाहेगा कि 1 अक्टूबर को उसकी स्थापना की 70वीं वर्षगांठ का जश्न इस अशांति की वजह से फीका पड़ जाए।

(लेखक भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में अतिरिक्त सचिव रह चुके हैं और फिलहाल सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटेजी के अध्यक्ष हैं)

(आलेख में लेखक के निजी विचार हैं। लेखक प्रमाणित करते हैं कि लेख की सामग्री वास्तविक/अप्रकाशित है और इसे प्रकाशन/वेब प्रकाशन के लिए कहीं नहीं दिया गया है तथा इसमें दिए गए तथ्यों एवं आंकड़ों के संदर्भ सही प्रतीत होते हैं)


Translated by Shiwanand Dwivedi (Original Article in English)

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