20 वीं पार्टी कांग्रेस के पहले शी जिनपिंग-सीसीपी नेतृत्व “कलर रिवोल्यूशन” को लेकर सजग
Jayadeva Ranade

चीन में “कलर रिवोल्यूशन” की आशंका को लेकर चाइनिज कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के नेतृत्व में चिंताएं अप्रैल महीने से लेकर अब तक पारदर्शी रूप में काफी बढ़ गई हैं। हालांकि शी जिनपिंग सहित चीनी कैडर्स ने 1991 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ दि सोवियत यूनियन (CPSU) के 1991 में विघटन के बाद उन आशंकाओं को दूर कर दिया है, लेकिन अमेरिका के साथ संबंधों में हाल के वर्षों में तेजी से आई गिरावट के बाद इसकी चिंताओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चीन में इस बात पर राय बनती जा रही है कि पेइचिंग और वाशिंगटन आने वाले भविष्य में सत्ता की प्रतियोगिता में शामिल नहीं, अमेरिका में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी। पीकिंग यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रेसिडेंट वांग जिसी और अमेरिका मामलों में चीन के शीर्षस्थ विश्लेषक ने इस साल जनवरी में कहा कि चीन और अमेरिका के बीच शत्रुता सत्ता की प्रतिद्वंद्विता और वैचारिक विभिन्नता के भी पार चली गई है।

इस बढ़ी हुई चिंता का स्पष्ट दिग्दर्शन मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी (MoSS) द्वारा ‘पीपुल्स डेली’ में 15 अप्रैल को लिखे गए एक संपादकीय लेख में हुआ है। इसमें कहा गया है,“हमें अवश्य ही इस बात को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए कि विभिन्न शत्रु शक्तियां पार्टी नेतृत्व का विघटन एवं तोड़फोड़ करने से रुकी नहीं हैं,...। वे हमारे देश में ‘कलर रिवोल्यूशन’ लाने की योजना बना रही हैं।” संपादकीय में दावा किया गया है कि MoSS इन तमाम प्रतिकूलताओं: “पार्टी नेतृत्व एवं समाजवादी प्रणाली में सभी तरह के जोखिमों एवं चुनौतियों”; “संप्रभुता सुरक्षा और विकास हितों को लेकर सभी तरह के खतरे और चुनौतियां”; और “चीन के मुख्य हितों और मुख्य सिद्धांतों को खतरे में डालने के सभी तरह के जोखिमों और चुनौतियों” के विरुद्ध सन्नद्ध है। उसी दिन ‘ग्लोबल टाइम्स’ में प्रकाशित एक आलेख में चेतावनी दी गई है: “पश्चिम-प्रेरित “कलर रिवॉल्यूशन” चीन के राष्ट्रीय और राजनीति की सुरक्षा पर ‘सर्वोच्च’ खतरा है!”

इसके बाद, ‘ग्लोबल टाइम्स’ (19 अप्रैल) में प्रकाशित संपादकीय भी अधिक स्पष्ट था। इसमें अमेरिका के पूरे विश्व में ‘कलर रिवोल्यूशन’ का समर्थक होने का दावा करते हुए उसे “सर्वाधिक अविश्वसनीय” देश के रूप में वर्णित किया गया है। संपादकीय का तर्क है, “अमेरिका के “रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धी” के रूप में नया-नया शिकार बना चीन इस मायने में भाग्यशाली है कि हम विगत 30 वर्षों में दुनिया भर में हुए “कलर रिवोल्यूशन” के गवाह रहे हैं। इस अर्थ में, यह राजनीतिक रूप से टीका लेने और अपनी प्रभाविता बढ़ा लेने के एक बूस्टर पाने के समतुल्य है, सुरक्षित है। चीन के लोग पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की फलदायक उपलब्धियों को संरक्षित करें और अमेरिका के दोहराए जा रहे इस कपटी कोलाहल कि, अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक खेल “लोकतंत्र और निरंकुशता” का है, के झांसे में न आ कर समझदार बने रहें। चीन अपना राष्ट्रीय बल लगातार बढ़ाता रहे और अमेरिका के उस पर दबाव देने की क्षमता को अपनी “ताकतवर हैसियत से” कमजोर करता रहे। चीन केवल एक दोस्त हो सकता है, जिसके साथ अमेरिका को सह-अस्तित्व के साथ रहना है, क्योंकि वह चीन को मिटा नहीं सकता है।”

इसी से संबंधित एक कार्यवाही में चाइनीज इंस्टिट्यूट ऑफ कंटेंपरेरी इंटरनेशनल रिलेशन सी (CICIR), जो चीन के सर्वाधिक प्रभावशाली थिंक टैंकों में शामिल है और सीधे MoSS का सहायक है, उसने 14 अप्रैल को पेइचिंग में ‘रिसर्च सेंटर फॉर ओवरऑल नेशनल सिक्योरिटी कंसेप्ट’ की स्थापना की।

‘पीपुल्स डेली’ के संपादकीय को चीन के MoSS द्वारा विदेशी खुफिया विरोधी नए नियमों को जारी करने के साथ प्रबलित किया गया था। इसे ‘पीपुल्स डेली’ और ‘शिन्हुआ’ में 26 अप्रैल 2021 को प्रकाशित किया गया था।

विदेशी खुफिया विरोधी नए नियम तत्काल ही प्रभावी हो गए थे, जिसके तहत राष्ट्रीय सुरक्षा प्राधिकरण को कंपनियों, संगठनों, और संभावनाशील विश्वविद्यालयों एवं निजी कारोबारियों की एक व्यापक सूची बनाने की अनुमति दी गई थी, मानों वे सरकार की संवेदनशील एजेंसियां हैं, जिनमें विदेशी घुसपैठ का खतरा है। MoSS अधिकारियों ने अप्रैल 26 को बताया कि “विदेशी जासूस एवं खुफिया एजेंसियां और शत्रु ताकतों ने, तरह-तरह की प्रविधियों के साथ और चीन के व्यापक क्षेत्रों में, अपनी घुसपैठ तेज कर दी है, जिनसे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं हितों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।” यह कहते हुए कि “मुख्य और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अभी भी ऐसे मुद्दे हैं, जैसे कि कौन से संगठन जासूसी विरोधी सुरक्षा और रोकथाम के उपायों के लिए प्राथमिक जिम्मेदारियां उठाते हैं, जो संस्थागत नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि नियमन स्पष्ट करता है कि “क्या, कौन और कैसे” विदेशी खुफियागिरी से रखवाली करेगा। MoSS विदेशी घुसपैठ की आशंका वाली कम्पनियों एवं संगठनों को कार्य-नियमावली, मागर्दशन, और अन्य प्रचार एवं शैक्षणिक सामग्री को मुहैया कराएगा। अधिकारी लिखित निर्देश जारी करेगा, प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करेगा, कामकाजी बैठकें करेगा, औऱ विभिन्न तरीकों का उपयोग करते हुए विदेशी खुफिया विरोधी कामों का निरीक्षण भी करेगा।

यह सामान्यत: सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय (एमपीएस) का काम होना चाहिए, जो घरेलू सुरक्षा एवं प्रतिरोधी खुफिया इंतजामों के लिए जवाबदेह है, उसे ही ऐसे नियमन जारी करने चाहिए। हालांकि पार्टी की तरफ एक “निरीक्षण समूह” 2020 के उत्तरार्द्ध में एमपीएस में भेजा गया था, जिसने तीन फरवरी 2021 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में एमपीएस की इस बात के लिए आलोचना की गई है कि वह राजनीतिक एवं कानूनी मामलों के आयोग के पूर्व प्रमुख झोउ योंगकांग और सार्वजनिक सुरक्षा के उप मंत्रियों, मेंग होंगवेई और सन लिजुन के “बचे-खुचे विष को हटाने के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रहा है”। इस रिपोर्ट के बाद, देश के सुरक्षा उपकरणों की “सफाई” का अभियान चलाया गया। ताकतवर एमपीएस के आलोड़न का काम लगता है कि अभी जारी है, जैसा कि शेन्जेन में कानून लागू करने वाले तीन ताकतवर निकायों को बेदखल किए जाने से संकेत मिला है।

राज्य सुरक्षा मंत्रालय द्वारा जारी चेतावनी का चीन के प्रांतीय पार्टी सचिवों ने भी अनुमोदन किया है। उन्होंने भी हाल के हफ्तों में निगरानी तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

फ्यूजिएन प्रांत के पार्टी सचिव यिन ली ने बताया कि सुरक्षा के एजेंडा में प्रशासन की सुरक्षा, विचारधारात्मक सुरक्षा, अहम आधारभूत संरचनाएं, रणनीतिक संसाधन एवं प्रौद्योगिकी इत्यादि आते हैं। सीमावर्ती प्रांत यनान के पार्टी सचिव रुआन चेंगफा ने ‘इन डेफ्थ प्रैक्टिस ऑफ दि ओवरऑल नेशनल सिक्युरिटी कॉन्सेप्ट-बिल्ड ए स्ट्रांग सिक्युरिटी बैरियर इन दि साउथवेस्ट ऑफ दि मदरलैंड’ शीर्षक से एक लंबा लेख लिखा, जो 22 अप्रैल को ‘पीपुल्स डेली’ में प्रकाशित हुआ था। इसमें "समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को रचनात्मक रूप से आगे बढ़ाने के लिए” शी जिनपिंग की प्रशंसा की गई थी। लेख में इस बात पर बल दिया गया था, “हम समग्र रूप से घुसपैठ विरोधी, विघटन विरोधी, आतंकवाद विरोधी और अलगाववाद विरोधी संघर्षों को मजबूत करेंगे, विदेशी ताकतों द्वारा घुसपैठ एवं विघटनकारी गतिविधियों को कड़ाई से और समुचित उपायों से रोकेंगे, और सुरक्षा क्षेत्र तथा सांस्थनिक सुरक्षा को सुदृढ़ता से निर्वहन करेंगे।" लेख में सीमा सुरक्षा के मसले का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि चीन" अपने वैदेशिक हितों के संरक्षण को मजबूत करेगा और पड़ोसी देशों में हमारे सभी उद्यमों एवं कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी उपाय करेगा।” इसी बीच, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में पेइचिंग एवं टार के नेताओं, जिनमें स्थानीय कार्यकर्ता भी शामिल हैं, के साथ मिल कर खास कर सीमावर्ती प्रांतों एवं जिलों में एक सघन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके “प्रयास के केंद्र में देश एकता की निगरानी और जातीय सद्भाव को मजबूती देना, अलगाववाद का डटकर मुकाबला करना, वनरोपण, बड़ी चुनौतियों एवं बड़े जोखिमों के आकार लेने से पहले ही उसे रोक देना तथा निरस्त कर देना एवं तिब्बत में दीर्घकालीन शांति तथा स्थिरता की नींव को निरंतर मजबूत करना है।”

ऐसा प्रतीत होता है कि “कलर रिवोल्यूशन” की चिंताएं पीपुल्स ऑफ लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में भी फिर से सुलग उठी हैं। ‘चाइनिज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज’ (CASS) में प्रकाशित पॉलिटिकल कॉलेज ऑफ दि नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिट के दो पीएलए अफसरों एवं ज्वाइंट लॉजिस्टिक सपोर्ट फोर्स लॉंगयान कम्प्रेहेंसिव वॉरहाउस सपोर्ट टीम के क्रमश: प्रकाशित आलेखों में यह स्वीकार किया गया है कि “जमीनी स्तर पर जड़ें जमाने के लिए सेना पर पार्टी के पूर्ण नेतृत्व के समक्ष कुछ नई चुनौतियां हैं।” इसमें कहा गया है कि “नए युग के अफसर एवं सैनिक आम तौर पर गंभीर एवं जटिल वातावरण की, और युद्ध भूमि में खून एवं आग के बपतिस्मा में प्रशिक्षण की कमी है।” और “पार्टी का सेना पर पूर्ण नियंत्रण में प्राय: समझदारी एवं महारत का अभाव दिखता है,” और “शत्रुतापूर्ण ताकतों का अति मायावी राजनीतिक दुष्प्रचार है।”

इसको समझते हुए कि “विचारों के कुहासे को दूर करना” महत्वपूर्ण है। इसमें कहा गया है “राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रेखांकित किया है कि कुछ पश्चिमी देश हमारे देश में “कलर रिवोल्यूशन” को बढ़ावा देने में लगे हैं, ऑनलाइन “कलर कोल्ड वॉर” के क्रियान्वयन में लगे हैं, और हमारे सैन्य अधिकारियों एवं सैनिकों को जड़ों से उखाड़ने एवं पार्टी के बैनर से सेना को हटाने के लिए “राजनीतिक अनुवांशिक संशोधन” के प्रयास की परियोजना में लगे हैं। विचारधारा एवं राजनीतिक सुरक्षा के क्षेत्र में हमें दी जा रहीं ये चुनौतियां बहुत गंभीर हैं।” लेख के निष्कर्ष में सलाह दी गई है कि “ ‘मीडिया पीढ़ी’ के युवा अफसर एवं सैनिकों के रूप में, उन्हें सार्वजनिक विचार के संघर्ष में अवश्य ही शामिल होना पड़ेगा"। यह तत्काल ही हमें हमारी मानसिकता में बदलाव की मांग करता है, युद्ध की तरह ऑनलाइन संघर्ष जारी रखने की ताकीद करता है, और सामाजिक भ्रष्टाचार के क्षरण तथा शत्रुतापूर्ण ताकतों की घुसपैठ एवं विघटन का प्रतिरोध करने के लिए अपने अधिकारियों एवं सैनिकों की क्षमता को लगातार मजबूत करने" की बात करता है।

पीएलए में विचारधारात्मक कमजोरी को लेकर ऐसे लेख पिछले कुछ समय से नहीं गौर किए जा रहे हैं। 2011-2013 के दौरान, असंख्य बौद्धिकों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और चीन के “उदार” अर्थशास्त्रियों को राजनीतिक सुधार के लिए “नव उदारवाद” का आह्वान करते और यह तर्क देते गौर किया गया था कि पीएलए को एक देश की सेना होना चाहिए और उसे सीसीपी की अधीनस्थ नहीं होना चाहिए। इस विदेश-प्रेरित “शत्रुतापूर्ण” दुष्प्रचार से सीसीपी एवं पीएलए नेतृत्व को परेशानी हुई थी। लिबरेशन आर्मी डेली में 17 जून 2012 को प्रकाशित एक लेख में पहली बार पीएलए में धड़ागत “उप-निष्ठा” का मामला उठाया गया था। इसके तत्काल बाद, समूचे पीएलए में राजनीतिक शिक्षा का अभियान बाद के पूरे साल तक चलाया गया था। यह फिलहाल जारी है।

तकनीकी आधारित सशस्त्र सेना होने की पीएलए की इस मुहिम के साथ, इसने 2001 से हाई स्कूलों एवं कॉलेजों के स्नातकों पर अपना ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। चीन के शिक्षा मंत्रालय से मिले डेटा और शिन्हुआ समाचार एजेंसी के खुलासे के अनुसार 2019 तक सेना में सूचीबद्ध होने वाले हाईस्कूल एवं कॉलेज के छात्रों की कुल तादाद 1.24 मिलियन थी। पीएलए अकादमी ने भी छात्रों को अपने यहां सूचीबद्ध किया था और उसने 2018 में 30,500 छात्रों को अपने यहां सूचीबद्ध किया था। ये कॉलेज एवं हाईस्कूल के ग्रेजुएट सेना में बहाली के एकल बड़े स्रोत हैं। पीएलए के वरिष्ठ सोपान को लेकर चिंताएं बनी हुईं हैं कि ऐसी भर्तियों के जरिए आने वाले छात्र अपने शिक्षकों एवं प्रोफेसरों के “उदार” विचारों से कहीं प्रभावित हो सकते हैं। बाद के वर्ष भर चलने वाले राजनीतिक शिक्षा अभियान अब समस्त पीएलए द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

कोविड-19 के प्रकोप फैलने और उससे सही तरीके से निबटने में सरकार की विफलता के बाद से अकादमिशियन एवं छात्र शी जिनपिंग एवं उनकी नीतियों के प्रमुख आलोचक रहे हैं। 2020-2021, में चीनी कारोबारियों एवं बौद्धिक भी सरकार के आलोचक हो गए थे। शी जिनपिंग ने हालांकि अपने आलोचकों को बुरी तरह कुचल दिया था और उनमें से कई हिरासत में लिए गए थे, उन्हें गंभीर रूप से दंडित किया गया था, किंतु सतह के नीचे जनअसंतोष अभी भी धधक रहा है।

इसी तरह, सेंट्रल डिस्पिलिन इंस्पेक्शन कमीशन (CDIC) ने घोषणा (28 अप्रैल) की कि वह “अनुशासन निरीक्षण” के अपने ताजा चक्र में देश के 31 विश्वविद्यालयों एवं शिक्षा मंत्रालय का “निरीक्षण” करेगा। 'दि पेपर’ (अप्रैल 28) में कहा कि किए जाने वाले निरीक्षणों के विवरण जारी नहीं किए गए हैं, प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने की होगी कि विश्वविद्यालय के संकाय एवं प्रशासक सीसीपी के सदस्यों के प्रति निष्ठावान रहें या पार्टी के अनुशासन का पालन करें।

अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा “सार्वभौमिक मूल्यों” की स्थापना की आड़ में “कलर रिवोल्यूशन” को बढ़ावा देने के प्रयासों से चेतवानियां मिल रही हैं, इसलिए विश्वविद्यालयों में इसके लेकर आवाज बुलंद की जा रही है। ‘चाइना एजुकेशन डेली’ के 13 मई के अंक में अनहुई विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों के प्रकाशित एक आलेख में “सार्वभौमिक” मूल्य के नकारात्मक प्रभावों से युवा छात्र को बचाने के महत्व पर जोर दिया गया था।” "सार्वभौमिक मूल्य” को “विचारधारात्मक संघर्ष के एक रणनीतिक प्रयास” के रूप में वर्णन करते हुए लेख में विश्लेषित किया गया था कि “स्वतंत्रता, लोकतंत्र, और मानवाधिकारों के बैनर तले दूसरे देशों को विचारधारा के स्तर पर निंदा करना और उन्हें बदनाम करना एक आम युक्ति है।” लेख में देश को सावधान किया गया है कि “सोवियत संघ के विघटन के बाद, कुछ पश्चिमी देशों ने “हमारी शीर्ष निगरानी” के जरिए तथाकथित “सार्वभौम मूल्यों” को बढ़ावा देने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

‘ग्लोबल टाइम्स’ में 16 मई को प्रकाशित एक लंबे लेख में इन चिंताओं को उजागर किया गया है। 'अमेरिकी एम्बेसी इंक्रिजिंगली ऑफेंसिव इन पुशिंग ‘पीसफुल इवोल्यून’ इन चाइना बाई रोपिंग इन एक्टिविस्ट्स विद मनी',शीर्षक वाले लेख में चीन में अमेरिकी दूतावास द्वारा हालिया शुरू की गई पहल पर उंगली उठाई गई है, जिसमें उस पर "अमेरिकी मूल्यों का प्रसार करने और चीनी लोगों के बीच अमेरिका के बारे में समझ विकसित करने, तथा अन्य गतिविधियों के लिए यहां के थिंक टैंक समेत गैर सरकारी संगठनों, नागरिक संगठनों एवं व्यक्तियों का समर्थन” देने का आरोप लगाया गया है। प्रत्येक पुरस्कार की अधिकतम राशि $30,000 रखी गई है।" चाइना फॉरेन अफेयर्स यूनिवर्सिटी के इंस्टिटयूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन के प्रोफेसर ली हैडोंग ने को यह चेतावनी देते हुए उद्धृत किया गया है कि अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा प्रायोजित यह कार्यक्रम “चीन के हांग कांग और मैको समेत सभी हिस्सों में (अपनी विचारधारा का) प्रचार करने और (उसकी) घुसपैठ करने की गरज से शुरू किया गया है।” उन्होंने कहा कि दूतावास अपने “कलर रिवोल्यूशन” को बढ़ावा देने के लिए “खास व्यक्तियों” या “संगठनों” को वित्तीय कोष मुहैया करता है या उनके बीच लाभों का हस्तांतरण करता है। ‘ग्लोबल टाइम्स’ कहता है कि "विश्लेषक इस बात को रेखांकित करते हैं कि पश्चिमी तर्ज के लोकतंत्र और शासन के अपने नियमों का सीधे-सीधे प्रोपैगैंडा करने के अलावा, यह प्राय: महिलाओं, मवेशियों एवं अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बातें करने की आड़ में “कलर रिवोल्यूशन” का निर्यात करता है।” इसने एक अन्य चीनी विशेषज्ञ को उद्धृत किया है, जिनका दावा है कि “अमेरिकी संस्कृति” एवं अन्य कार्यक्रमों को आगे “पीसफुल इवोल्यूशन” को बढ़ावा देने को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस अगले साल के अंत तक होना निर्धारित किया गया है, जो मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो तीसरी बार चीन के तीन शीर्ष पदों को हासिल करने का इरादा रखते हैं। इस संवेदनशील अवधि में कांग्रेस के लिए दौड़ और चीनी नेतृत्व लोगों के असंतोष तथा सीसीपी में शी जिनपिंग के विद्यमान आंतरिक विरोध से अवश्य ही अवगत होगा, जो लोक अभिव्यक्ति हासिल कर सकता है। चीन का नेतृत्व शिन्जियांग एवं तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं की अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा की जा रही आलोचनाओं को इन सीमावर्ती राज्यों में बनी मौजूदा बेचैनी को और हवा देने की उनकी कोशिशों के रूप में देखेगा। CICIR and CASS ने अप्रैल 2020 में ही ऐसा होने के बारे में पोलित ब्यूरो को आगाह कर दिया था। शी जिनपिंग अपने लिए गए फैसलों से ऐसे प्रयासों का जवाब देते दिखाई देते हैं।

Translated by Dr Vijay Kumar Sharma (Original Article in English)


Image Source: https://www3.nhk.or.jp/nhkworld/en/news/backstories/131/images/1fe56818d01d0c365f57fa217224e3cdea313e5b.jpg

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