मध्य एशिया में चीन का कर्ज-जाल
Dr Pravesh Kumar Gupta, Research Associate , VIF
पृष्ठभूमि

मध्य एशिया में चीन के अपने कई स्वार्थ हैं। पहला तो यही कि उसे अपने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग को सुरक्षित करना है, जिसकी सीमा मध्य एशिया के तीन देशों; कजाखस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान से मिलती है। शिंजियांग उइगर मुसलमानों का घर है। उइगर मुसलमान तुर्की जातीय अल्पसंख्यक समूह से ताल्लुक रखते हैं, जिनका मध्य एशिया के साथ जातीय और सांस्कृतिक जुड़ाव है। पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के गठन के समय से ही उइगर मुसलमान लगातार राज्य सत्ता का दमन झेलते आ रहे हैं, जिसने उन्हें चीन विरोधी आंदोलन छेड़ने पर मजबूर कर दिया है। चीन को भय है कि उइगर मुसलमान मध्य एशिया के अपने भाई-बंधुओं से समर्थन हासिल कर सकते हैं। इसी ने चीन को आर्थिक प्रभुत्व पर आधारित मध्य एशिया नीति बनाने पर विवश किया है, जो आधी पहलकारी है तो आधी प्रतिरोधी। सोवियत काल के दौरान, चीन और सोवियत संघ के बीच जारी दुश्मनी ने मध्य एशिया में चीन को अपने पांव पसारने के लिए उकसाया है। सोवियत संघ के विखंडन ने इस क्षेत्र में चीन की क्रमशः घुसपैठ को एक दिशा दी है।

दूसरे, चीन को अपने फलते-फूलते औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों की मांगों को पूरा करने के लिए हाइड्रो कार्बन संसाधन का मध्य एशिया से आयात करना है। इस लिहाज से चीन ने तेल और गैस पाइप लाइन में कई गुना निवेश किया है। तुर्कमेनिस्तान और कजाखस्तान तेल और गैस के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं, जबकि उज़्बेकिस्तान प्राकृतिक गैस का आपूर्तिकर्ता है। चीन तजाकिस्तान और किर्गिस्तान से 70 फीसद कच्चे माल का आयात करता है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में कजाखस्तान के नजरबायेव यूनिवर्सिटी में वन बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (ओबीओआर/बीआरआइ) के एक हिस्से के रूप में सिल्क रोड इकोनॉमिक बेल्ट (एसआरईबी) की आधारशिला रखी, जो पूरब और पश्चिम को जोड़ता है। इस उपक्रम के भू-राजनीतिक ताकत ज्यादा हैं, बजाय विकासात्मक कार्यों के, जैसा कि चीन दावा करता है। चीन ने मध्य एशिया में एसआरईबी के जरिये कई सड़कों, रेल और परिवहन गलियारे तथा स्पेशल इकोनामिक जोन (सेज) में चीनी निवेश का प्रस्ताव किया है। चाइना डेवलपमेंट बैंक (सीडीबी) और एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक (एक्जिम) मध्य एशिया की परियोजनाओं के मुख्य धनदाता बैंक हैं।

बीआरआइ के गुणगान में कहा जा रहा था कि यह समृद्धि और विकास लाएगा, लेकिन इसकी मंथर गति परस्पर विरोधी रुझान को प्रतिबिंबित करती है। अपने कर्ज के जाल में फंसाने के लिए चीन रियायत ब्याज दर पर कर्ज देता है, जो प्रायः व्यावसायिक ब्याज दरें और लंबे समय तक चुकता किए जाने वाला होता है।1 बीआरआइ के माध्यम से राज्य नियंत्रित चीन की संस्थाएं कम आय दर वाली अर्थव्यवस्थाओं को संरचनागत धन मुहैया कराती हैं, जो अंततः कर्ज के बोझ में दब जाती है।2.

आज कई देश चीन के कर्ज में डूबे हुए हैं। सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट की 2018 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बीआरआइ कर्ज लिए हुए आठ देश कर्ज के भारी दबाव में हैं। इन देशों में जिबूती, लाओस, मालदीव, मंगोलिया, मॉन्टेंगरो, पाकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान शामिल हैं।3.यह देश कर्ज की राशि और जीडीपी में पहाड़ जैसे अंतराल की वजह से हलकान हैं। जीडीपी से इनका कर्ज 50 फीसद से भी ज्यादा हो गया है, जिनमें बाहरी देशों में सबसे ज्यादा 40 फ़ीसदी कर्ज राशि अकेले चीन की है।4

चीनी निवेशक, फायदे से ज्यादा संकट

पहली बार इसकी घोषणा होने के आज 7 साल होने के आए, इसके बाद भी परियोजना की कोई चमचमाती उपलब्धि सामने नहीं आई है। इसकी वैश्विक पहुंच भी बहुत सीमित मालूम पड़ती है और यह क्षेत्रीय उपक्रम स्तर तक ही सिमटा दिखाई देता है। विकास के इसके कई सारे प्रतिगामी प्रभाव हैं, जिनमें निर्माण कार्यों में बाधा, स्थानीय पर्यावरण का विखंडन, लोगों के विस्थापन, सांस्कृतिक दखलअंदाजी इत्यादि दिखाई देते हैं। चीनी अधिकारी बीआरआइ उपक्रमों में हो रही देरी का यह कहकर बचाव करते हैं कि यह 100 साल में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट है, लेकिन मध्य एशिया के लोगों के पास इतने लंबे इंतजार का धैर्य नहीं है और वे इन परियोजनाओं की आलोचना करने लगे हैं। मध्य एशिया में चीनी निवेश की कई सारी दिक्कतें हैं।

1. पारदर्शिता का अभाव और भ्रष्टाचार

मध्य एशिया में चीन के नीतिगत लक्ष्य को पूरा करने में बाधक हैं, उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार और पर्याप्त निगरानी का न होना। अपनी कंपनियों की रक्षा करने और बीआरआइ के साथ निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए चीनी सरकार केवल बंद कमरों में डील करना पसंद करती है और वह केवल मेजबान देशों के वित्तीय अधिकारियों तथा राजनीतिक नेताओं पर ही भरोसा करती है। इससे स्थानीय प्राधिकरण में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, जो स्थानीय आबादी के लिए चिंता का कारण है।

2. लूटने लेने वाला कर्ज और कर्ज संकट

इस क्षेत्र में चीन एक अग्रणी निवेशक है, किंतु संयुक्त परियोजनाओं की बढ़ती तादाद के साथ-साथ मध्य एशिया का कर्ज भी बढ़ता जा रहा है। निर्यात क्षमता वाले कुछ देश जैसे कजाखस्तान, उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान चीनी कर्ज को चुकाने की क्षमता रखते हैं और इस लिहाज से चीनी कर्ज के मकड़जाल में उनके फँसने से की संभावना कम है, लेकिन मनी ऑर्डर पर आश्रित अर्थव्यवस्था तथा निर्यात की कम क्षमता वाले तजाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश ज्यादा अरक्षित हैं। उन पर खतरा ज्यादा है।

3. जन असंतोष

मध्य एशिया की आबादी चीन के इरादों को लेकर सोवियत संघ के वजूद के समय से ही आशंकित रही है। मध्य एशिया गणतंत्रों के लोगों के जीवन स्तर को समुन्नत बनाने में चीनी निवेशकों और उससे संबंधित विचारों का योगदान नगण्य रहा है। यद्यपि मध्य एशिया के समाज में चीन की घुसपैठ बढ़ी है, जिसने चीनी विरोध भी मानसिकता को जन्म दिया है। यह कजाखस्तान और किर्गिस्तान जैसे देशों में ज्यादा मुखर है, जिन्होंने सीजी इंटर्नमेंट कैंप में अपने जातीय बंधुओं के साथ अत्याचार होते हुए देखा है।

4. सांस्कृतिक घुसपैठ का भय

स्थानीय अभिजात्यों को पैसे दे-दे कर चीन ने मध्य एशिया के बाजारों, खासकर सीमाई इलाकों के बाजारों, पर कब्जा कर लिया है। इस तरह की भी घटनाएं देखने को मिली हैं कि चीनी लोग मध्य एशिया में जमीन खरीद रहे हैं और स्थानीय लड़कियों से शादियां रचा रहे हैं। इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों के मन में चीन की सांस्कृतिक घुसपैठ को लेकर डर बैठा दिया है। मध्य एशिया सीमाई इलाकों के स्थानीय अधिकारी चीनी लोगों द्वारा दिए जा रहे धन और भ्रष्टाचार की वजह से ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं।

चीनी कर्ज-जाल के काम करने का तरीका

पूरे विश्व में फौरन राजनीतिक और आर्थिक बढ़त हासिल कर लेने के मंसूबे के चलते चीन विकासशील देशों को उनकी बृहदकाय संरचनागत परियोजनाओं में सस्ते कर्ज के रूप में भारी धनराशि मुहैया कराता है। कई सारे विकासशील देशों को अपनी रूपांतरकारी संरचनागत परियोजनाओं के लिए चीन से मिलने वाले सस्ते कर्ज के जाल में फंसते देखा गया है। ये विकासशील देश ज्यादातर निम्न या मध्य आय वाले देश हैं, जो कर्ज-सधान की क्षमता नहीं रखते हैं। यही झटके में चीन को वह स्वर्णिम अवसर दे देता है, जिसकी आड़ में वह कर्ज में राहत देने के लिए कर्जदारों से अपने लिए अत्यधिक छूट और फायदे की मांग करता है।5 चीन का कर्ज के जाल में लोगों को फंसाने का तरीका न केवल मध्य एशिया में है बल्कि यह दक्षिण एशिया और अफ्रीका में भी प्रमुखता से है।

चीनी कर्ज का जाल : किर्गिस्तान और तजाकिस्तान मामलों के अध्ययन

मध्य एशिया, खासकर किर्गिस्तान, के लोगों के बीच चीन के बढ़ती कर्ज-राशि को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं, जहां प्रेस की स्वतंत्रता पर कुछ पहरेदारी है। किर्गिस्तान पर सकल विदेशी कर्ज में चीन का कर्जा ही 45. 3 फीसदी है।6 किर्गिस्तान अपेक्षातया विकासशील देश है। बीआरआइ संबंधी कुछ अहम संरचनागत परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, जिनमें अधिकतर विदेशी कर्ज से जुटाया गया धन है। 2017 के अंत तक, सार्वजनिक गारंटी कर्ज जीडीपी का 65 फीसद था, जिसमें कुल विदेशी कर्ज 90 फीसद है।7

चीन का एक्जिम बैंक सबसे बड़ा कर्जदाता बैंक है, जिसने 2016 तक 1.5 बिलियन डॉलर कर्ज दे चुका था, जो उसके कुल विदेशी कर्ज का 40 फीसद है।8 किर्गीज और चीनी अधिकारी जल-विद्युत परियोजनाओं की कड़ियां, एक चीनी-उज्बेकिस्तान रेलवे, एक अतिरिक्त हाइवे बनाने और मध्य एशिया-चीन के बीच एक गैसपाइप की डी-लाईन बिछाने पर बातचीत कर रहे हैं, जो किर्गिस्तान हो कर गुजरती है। यद्यपि मौजूदा वक्त में कर्ज का संकट मामूली समझा जा रहा है, किर्गिस्तान सार्वजनिक निवेशों के बेतहाशा बढ़ जाने से विनिमय दर में आई गिरावट के फलस्वरूप अब भी अरक्षित बना हुआ है।9

अमेरिकी सेंटर फॉर डवलपमेंट की 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार बीआरआइ प्रोजेक्ट पर जैसे-जैसे काम होगा, कर्ज बढ़ता जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि किर्गिस्तान और तजाकिस्तान समेत आठ देशों में अगर बीआरआइ की सभी योजनाओं पर अमल किया गया तो यह कर्ज संकट का दीर्घकालीन मसला बन सकता है।10

किर्गिस्तान में कोरोना वायरस के आर्थिक दुष्प्रभाव तो असीमित हैं। संकटग्रस्त स्वास्थ्य प्रबंधन और मनीऑर्डर से आने वाले धन में गिरावट के साथ किर्गिस्तान चीन का कर्ज चुकाने में असमर्थ हो गया है। विश्व अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के दुष्प्रभावों पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा संयुक्त रूप से बुलाये जाने पर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सोरोन्बे जीन्बेकोव सामाजिक मसलों पर खर्च के लिए कर्ज के पुनर्संयोजन किये जाने की वकालत की थी।11 चीन भी इस बैठक का हिस्सा था। यह स्पष्ट नहीं है कि चीन कर्ज के सधान मंज किर्गिस्तान को राहत देगा या नहीं, लेकिन किर्गिस्तान के उप प्रधानमंत्री एरकिन अस्रांडीव ने यह कहा कि चीन का एक्जिम बैंक कर्ज के पुन संयोजन के लिए राजी हो गया है। यह बयान किर्गीस व चीनी राष्ट्रपतियों के बीच अप्रैल 2020 में हुई बातचीत के बाद जारी किया गया था।12

वहीं, तजाकिस्तान चीन के एक्जिम बैंक के 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का देनदार है, जो तजाकिस्तान के सकल विदेशी ऋण का 40 फीसद है। तजाकिस्तान के विदेश मंत्री के मुताबिक तजाकिस्तान का कुल विदेशी ऋण जनवरी 2019 तक 2.9 बिलियन डॉलर था।13 तजाकिस्तान को चीन से 217 मिलियन डॉलर पहला कर्ज 2007 में मिला था। जनवरी 2019 तक तजाकिस्तान के विदेशी कर्ज और जीडीपी का अनुपात 38.9 फीसद था। तजाकिस्तान चीन के एक्जिम बैंक के अलावा विश्व बैंक, इस्लामिक बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार है।14

तजाकिस्तान को मध्य एशिया में चीन की बीआरआइ का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। आइएमएफ और विश्व बैंक के एक आकलन के मुताबिक एशिया का यह निर्धनतम देश कर्ज संकट के खतरनाक मोड़ पर है। चीन की विस्तारवादी स्वभावों के निशाने पर होने के बावजूद, यह देश ऊर्जा और परिवहन के अपने संरचनागत क्षेत्रों में निवेश के लिए भुगतान का प्रबंध करने के लिए कुछ और विदेशी कर्ज का जुटान कर रहा है। इसंमें बीआरआइ समर्थित प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। सर्वाधिक मह्त्वपूर्ण यह कि मध्य एशिया-चीन गैस पाइप लाइन (लाइन डी) तजाकिस्तान से गुजरेगी, उसके लिए 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर धन, जैसा कि बताया जाता है, चीनी एफडीआइ के जरिये मुहैया कराया गया है। संबद्ध भागीदारों ने इस परियोजना के काम और प्रगति के बारे में कुछ नहीं बताया है। दुशाम्बे के लिए चीन अकेला सबसे ब़ड़ा देनदार देश है और तजाकिस्तान के सकल विदेशी कर्ज में चीनी कर्ज 2016-17 की अवधि में बढ़ कर लगभग 80 फीसद हो गई।15

परिणाम

चीनी कम आय वाले मध्य एशिया की दिशा के लिए खतरनाक परिणाम लाया है। चीन की कंपनियां किर्गिस्तान और तजाकिस्तान में खनन के अधिकार हासिल कर ली हैं, क्योंकि यह देश चीन का कर्ज सधाने में असमर्थ है। तजाकिस्तान चीन की इलेक्ट्रिक अपारेट्स स्टॉक कंपनी लिमिटेड (टीबीईए) ने सुगड प्रोविंस में सोने की खदान अपर कुमार्ग को विकसित करना शुरू कर दिया है। इसके पहले कंपनी की पहुंच डुओब सोने की खदान तक थी और यह भी सुगड प्रोविंस में ही पड़ता है। दोनों पक्षों में हुए समझौते के मुताबिक टीबीईए को दोनों खदानों से महंगे धातु के खनन की इजाजत होगी, जब तक कि ताजिक पक्ष दुशांबे-दो में ताप और बिजलीघर परियोजना के निर्माण में लगे धन को वापस नहीं कर देता।16

अभी हाल ही में, चीन के राज्य नियंत्रित मीडिया ने कुछ आलेख प्रकाशित किये हैं, जिनमें कजाखस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान के विभागों पर चीन का दावा जताया गया है। इन आलेखों में कहा गया है कि चीन का कर्ज न चुका पाने के चलते तजाकिस्तान जैसे देश ने 1100 वर्ग किलोमीटर का भूभाग 2011 में ही चीन को दे दिया था। ऐसा दोबारा भी हो सकता है क्योंकि उन देशों पर चीन का कर्ज बढ़कर पहाड़ होता जा रहा है। इस बात की खबर है, चीन ने तजाकिस्तान के पामीर क्षेत्र में सैन्य अड्डा बनाया है, यह उदाहरण ही उसके कर्ज जाल को प्रमाणित करता है। इन सब बातों और तथ्यों के आधार पर मध्य एशिया में चीन की खुराफातें जग जाहिर हैं। हालांकि इन देशों की सरकारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चीन के विरुद्ध उभर रहे आक्रोशों के बावजूद इस मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लिया है।

पाद टिप्पणियां
  1. डायलन ग्रस्टल, ‘इट’स ए (डेब्ट)ट्रैप ! मैनेजिंग चाइना आइएमएफ कोऑपरेशन अक्रॉस द बेल्ट एंड रोड’, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज.
  2. वही
  3. टिम फर्नहोलज़, ‘चाइना “डेब्ट ट्रैप” इज एवन वर्स दैन वी थॉट,’ सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट, 29 जून 2018.
  4. डायलन ग्रस्टल, ‘इट’स ए (डेब्ट)ट्रैप ! मैनेजिंग चाइना आइएमएफ कोऑपरेशन अक्रॉस द बेल्ट एंड रोड’, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज. https://www.csis.org/npfp/its-debt-trap-managing-china-imf-cooperation-across-belt-and-road.
  5. झूमर मेहता, ‘चाइना’ज ग्रोइंग रेट वाया डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी’, लाइव मिंट, 16 सितंबर 2020.https://www.livemint.com/news/india/china-s-growing-threat-via-debt-trap-diplomacy-11592410677912.html.
  6. दायसुके कितादे, ‘सेंट्रल एशिया अंडरगोइंग ए रिमरकेबल ट्रांसफॉरमेशन: बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव एंड इंट्रा रीजनल कोऑपरेशन’, मित्सुई एंड कंपनी, ग्लोबल स्टेटस स्टडीज इंस्टिट्यूट मंथली रिपोर्ट, अगस्त 2019। https://www.mitsui.com/mgssi/en/report/detail/__icsFiles/afieldfile/2019/08/27/1908e_kitade_e_1.pdf
  7. जान हर्ली, स्कॉट मॉरिस एंड गेलिन पोर्टेलेंस. 2018। “ एग्जामिंग द डेब्ट इंप्लीफिकेशन ऑफ द बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव फ्रॉम पॉलिसी पर्सपेक्टिव,’’ सीजीडी पॉलिसी पेपर। वाशिंगटन, डीसी : सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट। https://www.cgdev.org/publication/examining-debt-implications-belt-and-roadinitiative-policy-perspective
  8. वही
  9. वही
  10. दाइसुके कितादे (2019), “ सेंट्रल एशिया अंडरगोइंग ए रिमारकेबल ट्रांसफॉरमेशन : बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव एंड रीजनल ऑपरेशन, मित्सुई एंड कंपनी, ग्लोबल स्ट्रैटेजिक स्टडीज इंस्टिट्यूट मंथली रिपोर्ट, अगस्त 2019.https://www.mitsui.com/mgssi/en/report/detail/__icsFiles/afieldfile/2019/08/27/1908e_kitade_e_1.pdf
  11. अज़ीरेक इमानालियेवा, ‘किर्गिस्तान : प्रेसिडेंट प्लीड्स सॉवरेन गिफ्ट रिस्ट्रिक्टिंग यूरेशियानेट, मई 29, 2020 https://eurasianet.org/kyrgyzstan-president-pleads-for-sovereign-debt-restructuring.
  12. ‘एक्जिम बैंक ऑफ चाइना टू रीशेड्यूल डेट ऑफ किर्गिस्तान‘ https://24.kg/english/151447_Exim_Bank_of_China_to_reschedule_debt_of_Kyrgyzstan_/
  13. https://www.asiaplus.tj/en/news/tajikistan/politics/20190611/what-does-tajikistan-expect-from-the-chinese-presidents-state-visit
  14. वही
  15. जान हर्ली, स्कॉट मॉरिस एंड गेलिन पोर्टेलेंस. 2018। “ एग्जामिंग द डेब्ट इंप्लीफिकेशन ऑफ द बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव फ्रॉम पॉलिसी पर्सपेक्टिव,’’ सीजीडी पॉलिसी पेपर। वाशिंगटन, डीसी : सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट। https://www.cgdev.org/publication/examining-debt-implications-belt-and-roadinitiative-policy-perspective
  16. मारिया,‘कैन सेंट्रल एशिया कंट्रीज एक्सटर्नल डेब्ट्स,’ टाइम्स ऑफ सेंट्रल एशिया, मार्च 17,2019।https://www.timesca.com/index.php/news/26-opinion-head/20949-can-central-asia-countries-pay-their-external-debts

Translated by Dr Vijay Kumar Sharma (Original Article in English)


Image Source: https://cdni0.trtworld.com/w1140/h490/q75/62360_CHN20190828USATRADECHINATARIFFS_1576142990963.JPG

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