ट्रंप के कार्यकाल के 100 दिन: अफ्रीका के लिए क्या अच्छा और क्या बुरा
Neha Sinha, Research Associate, VIF

29 अप्रैल, 2017 को डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में 100 दिन हो गए। कुछ प्रमुख क्षेत्रों के संबंध में उनकी विदेश नीति पर सख्त नजर रखा जाना स्वाभाविक है। अफ्रीका के बारे में ट्रंप प्रशासन के विचार शपथ ग्रहण से पहले ही पता चल गए थे। पूर्व राष्ट्रपति का अफ्रीका के बारे में मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण रहा था, लेकिन उस महाद्वीप के साथ ट्रंप के रिश्ते कैसे रहेंगे, इस बारे में राय बंटी हुई थीं। 20 जनवरी, 2017 के बाद से ट्रंप के कदमों ने महाद्वीप के बारे में उनका रवैया जाहिर कर दिया। विभिन्न हथियार समझौतों, बजट में प्रस्तावित कटौती और यात्रा संबंधी प्रतिबंध के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल के पहले 100 देनों का अफ्रीका पर प्रभाव पड़ा है (क्वार्ट्ज अफ्रीका, 2017)। ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा के मसलों पर जोर दिया है, लेकिन अफ्रीका में सामाजिक क्षेत्र को नजरअंदाज किया है।

कार्यभार संभालने के कुछ दिन बाद ही ट्रंप ने आव्रजन के बारे में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे, जिससे सात मुस्लिम बहुल देशों के नागरिक 90 दिन तक अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सके। शरणार्थियों के प्रवेश पर भी 120 दिनों तक प्रतिबंध लगा रहा। जिन तीन देशों को निशाना बनाया गया था, वे सूडान, लीबिया और सोमालिया थे। इसका खासा विरोध भी हुआ। इसके कारण शरणार्थी बेचैनी के बीच बस्तियों में ही इंतजार करते रह गए। यात्रियों को घंटों तक रोका गया और कई बार उनके बच्चों को भी हिरासत में लिया गया। तमाम अमेरिकी हवाई अड्डों पर फंसे लोगों को न तो वकीलों की मदद मिली और न ही भोजन मिला। ऐसे आदेशों पर अब अमेरिकी अदालतों में रोक लग गई है। मार्च 2017 में ट्रंप प्रशासन ने पश्चिम एशिया और अफ्रीका से आने वाले यात्रियों को लैपटॉप और टैबलेट के साथ विमान में सवार होने से रोक दिया। इजिप्ट एयर और रॉयल एयर मैरॉक जैसी बड़ी विमानन कंपनियों पर इसका बड़ा असर पड़ा, जिनकी काहिरा और कासाब्लांका से अमेरिका के लिए सीधी उड़ानें हैं।

अपने कार्यकाल के पहले सौ दिन में ट्रंप कई अफ्रीकी देशों के राष्ट्रपतियों से संपर्क में रहे हैं और उनसे अमेरिका एवं उन देशों के रिश्तों के भविष्य के बारे में बातचीत की है ताकि रिश्ते मजबूत किए जा सकें। किसी अफ्रीकी नेता के साथ उनकी पहली मुलाकात तब हुई, जब मिस्र के नेता अब्देल फतह अल सिसी से वाशिंगटन में मुलाकात की। वहां ट्रंप ने इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में मदद करने की इच्छा जाहिर की। अफ्रीका में ट्रंप का मुख्य जोर क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने पर है। फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप और नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी ने सुरक्षा, आर्थिक और प्रशासन संबंधी प्राथमिकताओं पर सहयोग के बारे में बातचीत की। ट्रंप ने नाइजीरिया को अमेरिका से विमान की बिक्री में मदद करने की इच्छा भी जाहिर की ताकि बोको हराम से लड़ाई में मदद मिले (मरीमा सो, 2017)। यह बातचीत नाइजीरिया के राष्ट्रपति से फोन पर हुई। इसके बाद ट्रंप और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने सहयोग एवं व्यापार में विस्तार के तरीकों पर चर्चा की ताकि सुरक्षा के मसलों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जा सके। ट्रंप ने मार्च में केन्या के राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा से भी संपर्क किया। उन्होंने अल-शबाब के लड़ने में केन्या के प्रयासों तथा सोमालिया में अफ्रीकन यूनियन मिशन में उसके योगदान की सराहना करते हुए पूर्वी अफ्रीका में सुरक्षा की स्थिति पर चिंता जताई। दोनों देशों के नेताओं ने केन्या में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की। ट्रंप ने ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति बेजी काएद एसेब्सी से भी उस देश में लोकतंत्र के संबंध में और आतंकवाद निरोधक साझेदारी के बारे में बातचीत की। इसके अलावा ट्रंप ने सोमालिया से 1994 में अमेरिकी सेना के निकलने के बाद पहली बार सोमाली सेना को प्रशिक्षण आदि देने के लिए कई दर्जन अमेरिकी जवान तैनात किए। इस कदम को क्षेत्र में अल-शबाब से लड़ने के ट्रंप प्रशासन के संकल्प का संकेत माना गया।

इन दिनों में राष्ट्रपति द्वारा एक ऐसा ठोस कदम उठाया गया है, जिसका अफ्रीका पर बहुत प्रभाव होगा और वह है परिवार नियोजन की सेवाएं मुहैया कराने वाले संगठनों को वित्तीय मदद रोकना। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) को तीसरा सबसे अधिक दान देने वाला देश है, जिसने 2015 में 7.59 करोड़ डॉलर दिए थे। लेकिन अप्रैल, 2017 में विदेश विभाग ने घोषणा की कि यूएनएफपीए को अमेरिकी मदद बंद की जा रही है। उसने दावा किया कि इसकी गतिविधियां ट्रंप सरकार द्वारा लागू की गई गर्भपात निरोधक नीति का उल्लंघन करती हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने वैश्विक प्रतिबंध का आदेश भी लागू कर दिया, जिससे ऐसे किसी भी संगठन को अमेरिकी सरकारी वित्तीय मदद नहीं मिलेगी, जो गर्भपात संबंधी सेवाएं, सूचना, परामर्श आदि मुहैया कराते हैं। इस नियम के बाद परिवार नियोजन कार्यक्रमों के लिए धन का वैकल्पिक स्रोत नहीं होने के कारण महिलाओं को प्रसव के दौरान मौत का खतरा हो सकता है, जबकि उप-सहारा अफ्रीका में प्रसवकालीन मृत्यु 1990 के बाद से ही कम हो रही है (मरीमा सो, 2017)।

आज पूर्वी अफ्रीका ऐसी मानवीय आपदा का सामना कर रहा है, जैसी पूरी दुनिया में 70 वर्ष में नहीं देखी गई। दक्षिण सूडान, सोमालिया और नाइजीरिया में लगभग 1.60 करोड़ लोग पर भुखमरी का खतरा है। वित्त वर्ष 2018 के बजट में विदेश विभाग और अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (यूएसएड) को मिलने वाला धन 28 प्रतिशत घटाए जाने की योजना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरस ने फरवरी 2017 में घोषणा की थी कि यमन, नाइजीरिया, सोमालिया और दक्षिण सूडान में फैली भुखमरी को टालने के लिए मार्च के अंत तक 4.40 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी। लेकिन विदेश विभाग तथा यूएसएड को वित्तीय मदद में 28 प्रतिशत कमी की ट्रंप की बजट योजना से निश्चित होता है कि विशेष तौर पर अफ्रीका में बजट 13 प्रतिशत कम हो जाएगा। मध्य अफ्रीकी गणराज्य, नाइजर और सिएरा लियोन जैसे देशों को मिलने वाली अमेरिकी विदेशी मदद बिल्कुल समाप्त हो जाएगी। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र को मदद में कटौती से पूर्वी अफ्रीका में संकट से निपटने की विश्व की क्षमता पर गहरा असर होगा। प्रस्तावित बजट में आपातकालीन शरणार्थी एवं प्रवास सहायता खाता भी बंद हो जाएगा। इस कार्यक्रम से सुनिश्चित होता है कि अमेरिका के पास शरणार्थियों की मदद के लिए पर्याप्त संसाधन रहें। 2014 में इस कोष के अंतर्गत अफ्रीकी महाद्वीप को 40.86 करोड़ डॉलर का आवंटन किया गया। धन का एक हिस्सा दक्षिण सूडान में आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लोगों, इथियोपिया, केन्या, सूडान तथा युगांडा में दक्षिण सूडानी शरणार्थियों की मदद के लिए प्रयोग हुआ था। धन से शरणार्थियों को स्वच्छ जल और सफाई, भोजन, स्वास्थ्य सेवा, लैंगिक हिंसा से संरक्षण आदि प्रदान किया गया। दक्षिण सूडान में हिंसा जारी रहते हुए यदि इस कोष को वित्तीय मदद घटाई जाती है तो क्षेत्र में शरणार्थियों के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा। फैमिली अर्ली वार्निंग सिस्टम्स नेटवर्क जैसे कार्यक्रमों और महिला समस्या कार्यालय को भी बंद किए जाने की अटकलें हैं। खाद्य सुरक्षा ब्यूरो के बजट में 67.8 प्रतिशत की कटौती होगी। बजट में अफ्रीकन डेवलपमेंट फाउंडेशन को मिलने वाली वित्तीय मदद भी समाप्त किए जाने का प्रस्ताव है (मरीमा सो, 2017)। कार्यक्रम स्वतंत्र संघीय एजेंसी है, जो सामुदायिक उद्यमों की मदद कर तथा उन्हें बीज पूंजी एवं तकनीकी सहायता देकर अफ्रीका में विकास को सहारा देता है। 2016 में समूह ने 500 सक्रिय उद्यमों में 5.30 करोड़ डॉलर का निवेश किया था। ट्रंप का 2018 का बजट अमेरिका की अफ्रीकन डेवलपमेंट फाउंडेशन को मिलने वाले धन में कटौती की बात करता है। अनुदान देने वाली यह एजेंसी उप-सहारा अफ्रीका में आरंभिक चरण वाले कृषि एवं ऊर्जा तथा युवाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को परिचालन सहायता, विस्तार एवं बाजार से संपर्क की सुविधा मुहैया कराता है। प्रस्तावित बजट का लक्ष्य एड्स से राहत दिलाने वाली राष्ट्रपति की आपातकालीन योजना ‘पेपफार’ को मदद मुहैया कराते रहना है। यह योजना 2003 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने आरंभ की थी। लेकिन वह पावर अफ्रीका जैसे अमेरिका-अफ्रीका कार्यक्रमों, अफ्रीकन ग्रोथ एंड अपॉर्च्युनिटी एक्ट तथा अफ्रीका में अपनी सैन्य कमान अफ्रीकॉम के बारे में खामोश है।

अफ्रीका के लिए सहायक विदेश सचिव की नियुक्ति में देर ने अमेरिका-अफ्रीका घटनाक्रम पर आरंभिक प्रभाव डाला है, जो संदेशों के आदानप्रदान में विलंब के रूप में सामने आया है। यह चिंता आम है कि नए अमेरिकी प्रशाासन में अफ्रीका को हाशिये पर धकेला जा सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए और चीन ही नहीं अपना प्रभाव तथा शक्ति बढ़ाने को आतुर दिख रहे अन्य देशों के उभरने के कारण अफ्रीका को अपने एजेंडा के लिए समर्थन हासिल करने में मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। अपना दबदबा बरकरार रखने के लिए अमेरिका को नए प्रशासन के तहत अफ्रीका के साथ सक्रिय संपर्क स्थापित करने के लिए तेजी से काम करना पड़ेगा (अदिति लालबहादुर, 2017)। इनमें से कई कटौतियों पर कांग्रेस के विरोध देखते हुए फिलहाल ये परिणाम दूर की संभावना भर हैं। कुल मिलाकर यदि कार्यकाल के पहले 100 दिनों को संकेत माना जाए तो इस बात की पूरी संभावना है कि राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्तियों के रुख को ही अपनाएंगे और अफ्रीका को अपने कार्यकाल के बाद के समय के लिए छोड़ देंगे।

विश्व के खनिज संसाधनों का भंडार मात्र होने के अलावा अफ्रीका की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है और दुनिया की कुछ सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाएं भी वहीं हैं। विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार आइवरी कोस्ट, इथियोपिया और तंजानिया में 2016 से 2020 के बीच 6.9 प्रतिशत से 7.7 प्रतिशत वृद्धि होगी। इससे दोनों देशों को उपभोक्ता बाजारों एवं बढ़े हुए व्यापार के अवसर मिलेंगे। अमेरिका ने ये अवसर चूके नहीं हैं। बराक ओबामा के नेतृत्व वाले अमेरिका के साथ अफ्रीका के अच्छे रिश्ते थे। अफ्रीकन ग्रोथ एंड अपॉर्च्युनिटी एक्ट को 10 वर्ष का विस्तार दिलाने के लिए द्विपक्षीय मंजूरी दिलाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि उनके प्रशासन को 2015-16 में अमेरिका से सस्ते गोश्त के आयात के कारण दक्षिण अफ्रीका में बदनामी झेलनी पड़ी थी, लेकिन इस कानून से अमेरिकी बाजार में प्रवेश पर आश्रित अफ्रीकी देशों को सुरक्षा मिल गई (अदिति लालबहादुर, 2017)।

ऐसे अनिश्चितता भरे समय में अफ्रीका की रणनीतिक प्रासंगिकता अन्य वैश्विक शक्तियों के लिए स्पष्ट हो गई हैं, जो महाद्वीप के साथ रणनीतिक, संयुक्त सहयोग के पारस्परिक लाभों को समझती हैं। अमेरिका के सामने अफ्रीका में ताकत गंवाने का, अपनी शक्ति और प्रभाव क्षेत्र खोने का खतरा है। अधिक चतुराई भरी अमेरिकी विदेश नीति महाद्वीप को प्राथमिकता प्रदान करने में मदद करेगी।

संदर्भ

अब्दुर्रहमान अल्फा शाबां, 2017 ‘ट्रंप्स 100 डेज इन ऑफिसः द हाईज एंड लोज फॉर अफ्रीका’, अफ्रीकान्यूज, नाइजीरिया
(http://www.africanews.com/2017/04/29/trump-s-100-days-in-office-the-high...).
अदिति लालबहादुर, 2017, (100 डेज ऑफ ट्रंपः अफ्रीका सीम्स टु बी अ लो प्राइयॉरिटी) मेल एवं गार्डियन (https://mg.co.za/article/2017-05-02-100-days-of-trump-africa-seems-to-be... priority).
मरीमा सो, 2017 ‘डॉनल्ड ट्रंप्स फर्स्ट 100 डेज एंड अफ्रीका’ अफ्रीका इन फोकस
क्वार्ट्ज अफ्रीका, 2017 ‘फॉर अफ्रीका, ट्रंप हैज बीन हेवी ऑन मसल्स बट लाइट ऑन कंपैशन’ (https://qz.com/971653/trumps-first-100-days-for-africa-heavy-on-muscle-b...).


Translated by: Shiwanand Dwivedi (Original Article in English)
Image Source: https://qz.com

Post new comment

The content of this field is kept private and will not be shown publicly.
3 + 11 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.
Contact Us