राष्ट्रीय औषधि नीति का पुनर्निर्माण

राष्ट्रीय औषधि नीति इतना विवादित विषय है कि पिछले चार दशक में एक के बाद सरकारें इससे जूझती रही हैं, लेकिन सही नीति तैयार नहीं कर पाई हैं। उपभोक्ताओं और औषधि उद्योग के न्यायसंगत हितों के बीच सही संतुलन बिठाने के लिए कई प्रयास किए गए किंतु दोनों ही पक्ष उनसे असंतुष्ट रहे। उपभोक्ताओं को लगता था कि ताकतवर औषधि निर्माण खेमे के सामने अक्सर सरकारें घुटने टेकती रही हैं और उद्योग की शिकायत थी कि हर ओर से बंदिशें लगाने के बाद उनसे काम करने की अपेक्षा की जाती है। नतीजा यह निकला है कि सरकार द्वारा लगाई गई बेजा बंदिशों से औषधि विनिर्माण क्षेत्र का नुकसान हुआ है और उपभोक्ता को ऐसी विषम नीति की कीमत चुकानी प

The Crumbling “Caliphate” and its Implications: A Western Perspective

Ever since the international community, particularly under the leadership of the United States (US), began its anti-Daesh (ISIS) coalition military campaign in late 2014, a debate had started, and it is still continuing, over the likely impact this operation on each of the participating countries and the Daesh itself.

मिलिए नए प्रमुख से; पुराने प्रमुख जैसे तो नहीं?

पाकिस्तान के अगले सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा की नियुक्ति की घोषणा से पहले जो अटकलें लगाई जा रही थीं और जो उत्साह था, उसे देखते हुए बीते जमाने के बैंड ‘द हू’ के गीत ‘वॉण्ट फूल्ड अगेन’ की पंक्तियां याद आती हैं, जिसका शीर्षक (भारत-पाकिस्तान संबंधों को और पाकिस्तानी सेना को देखते हुए) बिल्कुल उपयुक्त लगता हैः मीट द न्यू बॉस, सेम एज द ओल्ड बॉस। शीर्षक में प्रश्नचिह्न केवल इस बात पर है कि पाकिस्तान के नए बॉस के पद संभालने से पहले ही अधिक निराशावादी या संशयवादी न बना जाए और बातचीत के लिए कुछ गुंजाइश छोड़ी जाए।

पाकिस्तान से संबंध – सिंधु जल संधि, सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र का दर्जा और सीमा पार आतंकवाद

भारतीय सेना ने सितंबर के अंत में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दूसरी ओर जो लक्षित हमले (सर्जिकल स्ट्राइक) किए, वे राष्ट्रीय मानस पर इस तरह छा गए कि भारत के खिलाफ लगातार आतंकी कार्रवाई करते रहने और देश को निशाना बनाने वाले आतंकी संगठनों की मदद करने वाले पाकिस्तान को विशेषकर जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के शिविर पर हमले के बाद उत्तर देने के अन्य विकल्पों पर चर्चा ही बंद हो गई है। पिछली सरकारों के कार्यकाल में भारत के प्रभावहीन रवैये को देखते हुए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को पौरुष भरा जवाब माना गया। उसके बाद से लोहा गर्म है और भारतीय अधिकारी संकेत दे रहे हैं कि सितंबर में दिया गया जवाब इतने बड़े पैमाने और योज

Jammu & Kashmir - Deciding on Inviolability of Article 370

When the Jammu & Kashmir High Court, nearly a year ago, held that the State enjoyed “sovereignty” because such status had been “guaranteed under Article 370” of the Constitution of India, Pakistan-based Dawn newspaper gleefully ran the report. Back home in India too, the verdict came as a booster to separatists in the Kashmir valley and perhaps even some mainstream political leaders who are never tired of using the term ‘autonomy’ as a euphemism for ‘sovereignty’.

चुनावों और राजनीतिक दलों के लिए सरकारी मदद: क्या भारत इसके लिए तैयार है?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के विमुद्रीकरण के फैसले के राजनीतिक-आर्थिक असर पर 8 नवंबर से ही बात हो रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों की कानूनी मान्यता खत्म होने का ऐलान किया था और कहा था कि आधी रात से यानी लोगों को भरोसे में लेने के कुछ घंटे बाद से ही ये नोट रद्दी के टुकड़ों में बदल जाएंगे। प्रधानमंत्री ने यह ऐलान वित्त मंत्री से कराने के बजाय स्वयं ही किया, इसीलिए इसमें नाटकीयता का पुट भी आ गया। इसके बाद प्रतिक्रियाओं का सिलसिला चल निकला, जिसमें प्रशंसा भी हुई और आलोचना

Waiting for the Lokpal to Become Functional

Late last month, the Government and the Supreme Court ‘clashed’ yet again, but this time not on the selection of judges. The apex court expressed deep reservations over the continuing delay in the appointment of a Lokpal. It was so agitated that it virtually threatened to take over the functions of Parliament and the Government in the matter. Hearing a petition moved by an NGO, Common Cause, a three-judge Bench headed by Chief Justice of India TS Thakur told the Government, “The Lokpal institution must become functional.

भारत के कायाकल्प के लिए विमुद्रीकरण के बाद ‘बाबू समुदाय’ द्वारा सुशासन की फौरी आवश्यकता

प्रधानमंत्री का 500 और 1,000 रुपये के नोट बंद करने अर्थात् विमुद्रीकरण का फैसला ऐतिहासिक है, जिसे जनता की सराहना मिली है। सरकार को आशा है कि निकट भविष्य में भ्रष्टाचार, काले धन और आतंकवाद की बुराइयों के विरुद्ध युद्ध में विजय प्राप्त होगी। प्रधानमंत्री ने भारत के तीव्र विकास के लिए पहले भी ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’, ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे कई कदम और योजनाएं आरंभ की हैं। किंतु वांछित लाभ प्राप्त करने के लिए उनकी प्रगति और परिणाम पर करीब से नजर रखने की आवश्यकता है।

Tamil National Alliance’s Critique on Budget 2017- Time to Introspect for the Opposition Party

Sri Lanka Finance Minister Ravi Karunanayake presented the first reading of the Budget 2017 on November 10. The second reading debate and committee stage debate are scheduled to be held within 26 days in the months of November and December. In the light of the many economic challenges Sri Lanka is currently faced with, the Budget 2017 remains vital in outlining the Government’s plans for the next year and play an important role in regaining public confidence (or at least diminishing the negatives) in the government’s policies. Overall, the Government has allocated over Rs.