सशस्त्र सेनाओं को राजनीति से दूर रखें!

भारत की सशस्त्र सेनाओं ने हमारे पश्चिमी पड़ोसी के खिलाफ चार युद्ध लड़े और जीते हैं, एक ऐसे पड़ोसी के खिलाफ, जहां देश के पास सेना नहीं है बल्कि सेना के पास देश है। इन स्पष्ट जीतों के बावजूद भारतीय सेना उस तरह राजनीति की शिकार कभी नहीं हुई है, जैसा हमने पश्चिम में सीमा के पार देखा है। यहां सेना पूरी तरह गैर राजनीतिक रही है, इतनी गैर राजनीतिक कि वहां राजनीतिक चर्चा से भी सख्त परहेज किया जाता है। सशस्त्र सेनाओं ने लोकतांत्रिक भावना का पालन किया है और हमेशा सेना पर ‘असैन्य नियंत्रण’ के सिद्धांत का पालन करते रही हैं। इसी भावना के कारण सरकार उग्रवाद से लेकर प्राकृतिक आपदाओं जैसी घरेलू आपात स्थितियों में

घूसखोरी और काले धन के खिलाफ मोदी का साहसिक संग्राम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों की कानूनी मान्यता 8 नवंबर, 2016 की आधी रात से खत्म होने की जो हैरत में डालने वाली घोषणा की, वह दशकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को घुन की तरह चाट रहे काले धन के अभिशाप पर सबसे हिम्मत भरा हमला है। इस कदम को हरेक स्तर पर गोपनीय रखना था और सरकार इस बात के लिए बधाई की पात्र है कि विभिन्न स्तरों पर सलाह-मशविरे के बावजूद गोपनीयता सुनिश्चित की गई। अब कुछ आंकड़ों पर नजर डालिए।

General Sinha: Great Soldier-Scholar

In passing away of Lieutenant General Srinivas Kumar Sinha, PVSM, on 17 Nov 2016, at the ripe age of 90 years, the nation has lost one of her most celebrated soldier scholar.

आतंकवाद ही था असली एजेंडा

ब्रिक्स और बिम्सटेक शिखर बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद के साथ उसके संबंधों के मसले पर जिस तरह आड़े हाथों लिया, वह भारत में कई लोगों को अतिवादी लगा। आलोचना के विभिन्न बिंदुओं का सार यही है कि इन बहुपक्षीय आयोजनों में पाकिस्तान पर इतना ज्यादा ध्यान देकर हमने अपना कूटनीतिक दायरा छोटा कर लिया, खुद को एक बार फिर पाकिस्तान से जोड़ लिया और इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने बढ़ते कद को बौना कर लिया। भारत को छोटे देशों की जमात में नहीं आना चाहिए, जो बहुपक्षीय मंचों पर भी केवल एक मुद्दे के पीछे पड़े रहते हैं। दलील दी जाती है कि ऐसे मंच किसी भी मुद्दे पर प्रतिभागियों का रु

Demonetization: Restoring Probity in public Life

The dramatic announcement by the Prime Minister on the 08-11-2016 regarding De-monetising Rs 500 and Rs 1000 notes from the midnight of the same day has electrified the national mood and has altered the paradigm of public life.

War Against Daesh (ISIS) – An Assessment of Mosul Campaign

After having crushed the concept of the Caliphate little over 90 years ago by Kemal Ataturk, the first president of the modern-day Turkey, a renewed effort was made by a newly-founded Sunni militant group, which, today, is known by the name Islamic State of Iraq and Syria (ISIS). Under the leadership of the new self-proclaimed Caliph, Abu Bakr al-Baghdadi, the ISIS, also known as ‘Daesh’, was able to establish a so-called ‘caliphate’ in Syria and Iraq after capturing vast swathes of land, particularly in Iraq.

भारत की पहले ही कार्रवाई एवं प्रतिकार (पीएईआर) करने की नई रणनीति

भारत के हालिया लक्षित हमलों (सर्जिकल स्ट्राइक) को कुछ लोग प्रतिकार तथा उड़ी हमलों का बदला लेना मानते हैं। इसमें कुछ सच तो है, लेकिन यही पूरा सच नहीं है। भारत ‘हजारों घावों’ के जरिये उसे तकलीफ देने की पाकिस्तान की रणनीति के कारण हो रही आतंकी कार्रवाई को ढाई दशक से झेल रहा है। इस अवधि के दौरान प्राथमिक तौर पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाली आतंकी घटनाओं के कारण कश्मीर घाटी तो सुलगती ही रही है, मुंबई और संसद हमलों समेत तमाम हमलों की शक्ल में भारत के दूसरे हिस्सों ने भी आतंक की तपिश झेली है।

Keep The Armed Forces Out of Politics!

The Indian Armed Forces have fought and won four wars against our Western neighbor, a state where the country does not have an army but the Army has a country. Despite these obvious victories, the Indian Armed Forces have never fallen prey to the world of politics, as witnessed across the Western border, and have decidedly remained apolitical with even discussions of politics in the rank and file being actively discouraged. The Armed Forces have adhered to the principle of ‘civilian control’ of the military both in letter and spirit in the true democratic vein.