रणनीतिक धैर्य से सुलझ सकती है चीन समस्या

चीन हमेशा से भारत के लिए समस्या रहा है। ऐसा इसीलिए भी है क्योंकि चीनी स्वयं तो अबूझ हैं और दिए जा रहे संदेश या संकेत को बूझने की कोशिश में उनके वार्ताकारों को अक्सर घंटों लग सकते हैं। लेकिन ऐसा इसलिए भी है क्योंकि एक दूसरे के साथ किसी भी तरह का बुनियादी या सभ्यतागत विवाद नहीं होने के बावजूद भारत और चीन कभी सामरिक मेल-मिलाप नहीं कर पाए हैं। 1962 के सीमा संघर्ष की कड़वाहट बेशक है। दोनों देशों के आकार और क्षमताओं को देखते हुए उनके बीच मुकाबले की भावना भी है। इसके अलावा क्षेत्रीय विवाद भी हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक संदर्भों में देखने पर मामूली ही लगते हैं। इसीलिए दोनों देशों को टकराव भरे

What’s the Real Story in Turkey?

I was in Ahmedabad when the attempted or rather failed ‘coup de tat’ took place in Turkey. I was to speak at a corporate function about India’s national security. However, my hosts requested me to first specifically speak for a few minutes on Turkey because ostensibly most of the audience could not join the dots about what exactly was happening in that country. I readily obliged because that’s a country you can’t fail to know if you have any pretensions like me of being a strategic commentator.

India and SCO: Tashkent Summit and Beyond

India came one step closer to becoming a full-fledged member of the Shanghai Cooperation Organization (SCO), at the summit held last month. Some of the required procedures were yet to be completed. For instance, there are about 28 documents which have to be signed by India.

बुरहान वानी की मौत और उसके नतीजे

दक्षिण कश्मीर के बिल्कुल दक्षिणी हिस्से में कोकरनाग अलसाया, शांत, छोटा सा शहर है। पीर पंजाल की ऊंची पहाड़ियों के साये तले बसा और निचली पहाड़ियों पर जंगलों से घिरा यह शहर किसी वक्त आतंकवाद का अड्डा था क्योंकि यह क्षेत्र आतंकवाद के लिए मुफीद था। सहस्राब्दी के पहले दस वर्षों में भारतीय सेना की मशहूर इकाई 36 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) (गढ़वाल राइफल्स) ने पूरा इलाका साफ कर दिया और आतंकवाद के मामूली निशान ही बाकी रह गए। इस कारनामे के लिए उसे चार सीओएएस यूनिट साइटेशन और कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

Implications of the China-Pakistan Economic Corridor

The China-Pakistan Economic Corridor (CPEC), announced during Chinese President Xi Jinping’s well-publicised two-day (April 20-21, 2015) visit to Pakistan and with a value estimated by Pakistanis at US$ 46 billion, is a bold geo-economic initiative which alters the strategic environment in the region. It is the first step towards implementing the recommendation of Chinese strategists that “China should begin to shape, rather than just integrate into, the regional and international environment because China now has the capacity to do so”.

Urgent need for Common Civil Code

The debate on whether the time has come for India to have a Uniform Civil Code that will govern personal laws of all its citizens irrespective of their religious affiliation, has been renewed with the Union Government seeking a report from the Law Commission of India on the subject. Last month, the Union Ministry of Law and Justice asked the Commission to submit its perspective on all aspects of the proposed legislation. It is not something that will be decided in a hurry.

Analysis of Recent Trends in China’s Economy

In the wake of recent downward trend in China’s economy, there have been a spate of articles and analyses predicting its early doom. However, It does seem unreasonable to postulate that an economy with over 71 per cent labour force participation, an economy that is still the largest exporter in the world--a title it has held since 2009--is regressing, especially after only just two years of relatively poor growth.

ढाका पर आतंकी हमला

“यह तो होना ही था” - सदमे और अविश्वास के बीच पहली प्रतिक्रिया यही थी। उदार और सहिष्णु इस्लाम में यकीन रखने वाला और उसी रास्ते पर चलने वाला बांग्लादेश स्तब्ध था तथा इस्लाम के नाम पर रमजान के महीने में अर्थहीन हिंसा तथा इतने बेकसूरों की क्रूरता भरी हत्या की इस घिनौनी हरकत को स्वीकार ही नहीं कर सका। क्षुब्ध दिख रहीं प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यही बात कह भी दी, “यह बेहद घिनौनी हरकत है। ये किस तरह के मुसलमान हैं? उनका कोई मजहब नहीं है।” (टाइम्स ऑफ इंडिया)

भारत का सियोल अभियान

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में प्रवेश हासिल करने की भारत की कोशिश को चीन ने नाकाम कर दिया और कुछ वर्गों ने इसके लिए भारत द्वारा अपनाई गई कूटनीतिक अतिसक्रियता की आलोचना की है। आलोचकों के मुख्य तर्क हैं कि इतनी सक्रियता अनावश्यक थी क्योंकि एनएसजी की सदस्यता महत्वपूर्ण है, कि भारत दूसरे दर्जे का सदस्य होता और उसे मिला झटका राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी है।

ऊपर दिए गए सभी तर्क बेबुनियाद हैं।

China’s Day of Reckoning

The Permanent Court of Arbitration (PCA) has issued its award in the arbitration case between the Philippines and China. The Philippines had initiated arbitration proceedings against China in January 2013 under Annex VII to the United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) “with respect to the dispute with China over the maritime jurisdiction of the Philippines in the West Philippine Sea”1.