चीन की दूसरी महान दीवार

पिछले लगभग एक साल से और विशेषतौर पर पिछले महीने से चीन को दूसरी ‘महान दीवार’ (ग्रेट वाल) का निर्माण कार्य करते देखा गया है। अमेरिका के रक्षा सचिव, एश्टन कार्टर ने मई 2016 में अमेरिकी नौसेना अकादमी के स्नातक समारोह में और उसके बाद शांगरी-ला वार्ता 2016 में इसी दीवार का संदर्भ देते हुए चीन द्वारा ‘अलगाव की महान दीवार’ (ग्रेट वाल ऑफ आइजोलेशन) खड़ी किए जाने की बात कही थी। अमेरिकी प्रशांत बेड़े के कमांडर एडमिरल हैरी बी हैरिस जूनियर, ने भी दक्षिण चीन सागर में चीन के दावा करने व उसके निर्माण गतिविधियों के संदर्भ में चीन द्वारा ‘रेत की महान दीवार’ खड़ी करने पर बोलते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया था। हाला

Burhan Wani's Killing and Its Aftermath

Kokarnag in the southernmost part of South Kashmir, is a sleepy little township. It once was the bastion of militancy due to the presence of the lofty Pir Panjal range in whose shadow it lies and the forested tracts of the lower hills; the terrain was tailor made for militancy. Through the first ten years of the millennium one of the Indian Army's famous units, 36 Rashtriya Rifles (RR) (Garhwal Rifles), cleaned the area out leaving few signs of militancy behind. It earned as many four COAS Unit Citations and many more awards for this feat.

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती - क्या वह अंतिम रूप से पहुंच चुकी हैं?

उपचुनाव जीतना केवल एक शुरुआत है

भारत में, परंपरागत रूप से राज्य विधानसभा के लिए उपचुनाव पदस्थ मुख्यमंत्री के उसके पद पर बने रहने के लिए, तकनीकी रूप से एक संवैधानिक वैधता हासिल करना है। आम तौर पर राजनीतिक हित का यह एक बड़ा सौदा नहीं है। आंकड़ों के लिहाज भी देखें तो, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कुछ ही ऐसे अवसर हुए हैं, जब पदस्थ मुख्यमंत्री इस प्रकार जीत हासिल करने में नाकाम रहे हों। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र पर 23 जून को हुए उपचुनाव को जीतने में सफल रहीं। यह सीट इस साल जनवरी में उनके पिता के निधन के बाद से खाली हुई थी। अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र मुफ्ती साहब का राजनीतिक ग

क्या ईरान ने त्याग दिया है अपना परमाणु विकल्प?

वर्ष 2016 में ईरान का बाकी दुनिया के साथ राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरीकों से पुनर्मिलन हुआ। जनवरी में जेसीपीओए (परमाणु समझौते पर संयुक्त समग्र कार्य योजना) लागू होने के कारण ही ऐसा हो पाया। ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंध हटा लिए गए और वहां एक के बाद एक कई द्विपक्षीय यात्राएं हुईं, उसके राष्ट्रपति विदेश गए और दूसरे नेता ईरान पहुंचे। किंतु दोस्ती के इस माहौल में एक पहलू बिल्कुल उलट दिखता है और वह है ईरान का युद्धक प्रक्षेपास्त्र कार्यक्रम।

Terror Strikes Dhaka

ISIS or Home Grown-Radicalization Has Taken Deep Roots in Bangladesh

"This was waiting to happen"- this is how the initial reaction of shock and disbelief expressed itself. A stunned Bangladesh that has always believed in and practiced moderate and tolerant Islam, just could not come to terms with the dastardly act of senseless violence and brutal killing of so many innocent people, ostensibly in the name of Islam and that too in the holy month of Ramadan. A visibly disturbed Prime Minister Sheikh Hasina said so in as many words, "It was an extremely heinous act. What kind of Muslims are these people? They don't have any religion. “(Times of India) 

नेपाल में संघीय प्रणाली से मुंह मोड़ना संभव नहीं

नेपाल में “त्वरित गति” से नया संविधान बनाने के लिए हुए 16 सूत्रीय समझौते के विरुद्ध जून 2015 में शुरू हुआ मधेश आंदोलन अभी तक जारी है। मधेशी समुदाय के सबसे तीव्र विरोध के बीच 20 सितंबर, 2015 को संविधान की घोषणा कर दी गई, लेकिन विडंबना है कि घोषणा के नौ महीने बाद भी यह लागू नहीं हो सका है। मधेश आंदोलन के दौरान लगभग 60 लोग मारे गए और हजारों घायल हो गए। तराई में छह महीनों की हड़तालों तथा नेपाल-भारत सीमा पर विशेषकर बीरगंज-रक्सौल चौकी पर पांच महीने की नाकाबंदी के कारण रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों समेत आवश्यक वस्तुओं की बेहद कमी हो गई और अर्थव्यवस्था पंगु हो गई। आर्थिक नाकाबंदी के दौरान हर महीने ने

Strategic Patience Could Solve the China Conundrum

China has always been something of a conundrum for India. This is partly because the Chinese are somewhat inscrutable and often enough their interlocutors can spend hours in trying to decipher the underlying message or hint or signal that is being conveyed. But partly it is also because somehow India and China have never quite managed to have any kind of strategic convergence despite not having any fundamental, much less a civilizational, conflict, with each other. Of course there is the baggage of the 1962 border conflict.

India's Seoul Exercise

India's activist diplomacy to secure entry into the Nuclear Suppliers Group (NSG) has been criticised in some quarters in India consequent upon China's having foiled it. The main arguments propounded by the critics are that such activism was unwarranted as NSG membership is unimportant, that India would be a second class member, and that the setback faced by it constitutes a major embarrassment for the nation.

The aforesaid arguments are completely ill founded.

भारत की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सुधार

पिछले दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचने वाले और उसकी अंतरात्मा को झकझोर देने वाले बिहार राज्य शिक्षा बोर्ड घोटाले ने निस्संदेह राज्य के शैक्षिक माहौल की दुर्गति से पर्दा उठा दिया है। उसने व्यवस्था का घिनौना सच दिखाया है, जहां वाजिब कीमत (आपको जो श्रेणी चाहिए, उसके आधार पर तय होती है) देकर बोर्ड परीक्षाओं में (जिन पाठ्यक्रमों को नहीं पढ़ा, उनके लिए भी) अंक और प्रमाणपत्र खरीदे जा सकते हैं। साल भर पहले बिहार में ही परीक्षा भवन की दीवारों पर स्पाइडरमैन की तरह चढ़ते और भीतर परीक्षा दे रहे छात्रों को नकल की पर्चियां देते लोगों की तस्वीरें देखकर पूरा देश सन्न रह गया था। इस बार की ही तरह उस समय भी

CM Mehbooba Mufti - Has She Finally Arrived?

Winning the By-Election is only the beginning

In India, traditionally a by-election to the State Assembly to technically endorse the constitutional legitimacy of an incumbent Chief Minister’s continuance in office, normally does not evoke a great deal of political interest. Statistically speaking also, there might have been possibly only a couple of instances in the history of Indian democracy where the incumbent Chief Minister would have failed to obtain such an endorsement.